पंजाब में पराली प्रबंधन में सब्सिडी घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल आया है। दो साल पहले हुए इस घोटाले की जांच फिर से शुरू हो गई है। सूबे की नई सरकार ने कृषि विभाग के सचिव को इसकी जांच के निर्देश दिए हैं। सात दिनों में जांच रिपोर्ट फाइल करने को कहा गया है। जांच में कृषि विभाग की इंजीनियरिंग विंग के प्रमुख सब्सिडी का रिकार्ड नहीं पेश कर पाए थे।
पराली प्रबंधन का यह घोटाला 18 अक्तूबर 2019 को प्रकाश में आया था। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की जांच में अवशेष प्रबंधन योजना के तहत बड़ी संख्या में फार्म कस्टम हायरिंग सेंटर (मशीनरी बैंक) का डाटा विभाग के पास नहीं मिला था। रिपोर्ट में कृषि मंत्रालय ने देखा था कि 107 बैंकों में से केवल 73 के ही सत्यापन की जानकारी मिल पाई थी।
इस मामले में प्रत्येक बैंक को 6 से 8 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई थी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि कई मौजूदा केंद्रों में कोई भी मशीन की खरीद ही नहीं की गई थी। इस खुलासे के बाद सरकार ने पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया, जो घोटाले में जिम्मेदारी तय करने में ही विफल हो गई थी। अब एक बार फिर पंजाब में सरकार के बदलते ही घोटाले की फिर से जांच शुरू कर दी गई है।
सरकार ने कृषि विभाग के इंजीनियरिंग विंग के प्रमुख के खिलाफ मशीनरी वितरण का रिकॉर्ड पेश करने में विफल रहने पर जांच शुरू कर दी है। सात दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार द्वारा जारी एक आदेश के तहत विंग प्रमुख फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत मशीनों पर खर्च किए गए धन का रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में विफल रहे हैं। सचिव (कृषि) को जांच शुरू करने और सात दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।