चंडीगढ़। ट्राइसिटी में बिना पंजीकरण के कैब सेवा चलाने वाली इनड्राइवर पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र, हरियाणा व पंजाब सरकार सहित यूटी प्रशासन को 3 नवंबर तक इस मामले में पक्ष रखने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी हरगोबिंद सिंह ने एडवोकेट प्रदीप शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि बिना भारत में रजिस्ट्रेशन के इनड्राइवर कैब सर्विस उपलब्ध करवा रही है। याची ने कहा कि एक ओर तो ऐसा करने से देश को राजस्व का नुकसान हो रहा है क्योंकि पैसे सीधा ड्राइवर लेता है और इसलिए जीएसटी की वसूली भी नहीं हो पाती। दूसरी ओर यह कंपनी विदेशी है और भारत में रजिस्टर नहीं है। ऐसे में यह भारतीय कानून की जद से भी बाहर है।
ट्राइसिटी में यह सर्विस जुलाई 2019 में आरंभ की गई थी और तब से यह जारी है। एप में लोगों से उनकी निजी जानकारी ली जाती है और भारतीय कानून के आधीन न आने के चलते इस जानकारी को बेचा जा सकता है। इससे लोगों की निजता के हनन का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही यहां पर ड्राइवरों के लाइसेंस की वेरिफिकेशन भी पूरी तरह से नहीं की जाती है जिससे ग्राहकों की सुरक्षा को खतरा बना रहता है।
याची ने बताया कि भारतीय प्रावधान के तहत एप में पैनिक बटन अनिवार्य होता है, जिसे खास तौर पर महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए रखा गया है। इस एप में इस तरह का पैनिक बटन भी नहीं है। एप को दुनिया के कई देशों में प्रतिबंधित किया गया है और भारत में भी इस पर प्रतिबंध होना चाहिए। हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों से एप पर की गई कार्रवाई को लेकर स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।