चंडीगढ़। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का सोमवार को हरियाणा में भी असर दिखा। यूनियनों से जुड़े कर्मचारी संगठन व मजदूर रविवार देर रात से ही हड़ताल पर चले गए। इससे सफाई, बिजली आपूर्ति और बस सेवा पर व्यापक प्रभाव पड़ा। दफ्तरों में भी कामकाज प्रभावित हुआ। मंगलवार को भी हड़ताल जारी रहेगी। आपातकालीन सेवाएं जारी रखी जाएंगी। परिवहन विभाग का दावा है कि 2637 में से 1564 बसों ने प्रदेश व अन्य राज्यों में सेवाएं दी।
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा के अनुसार 2400 बसों का चक्का जाम रहा। 19 हजार में से लगभग 15000 रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। कुछ डिपो में प्रशासन ने बिना परिचालकों के किलोमीटर स्कीम की बसों को सड़कों पर खाली दौड़ाया। रोडवेज कर्मचारियों की 2018 के बाद यह सबसे बड़ी हड़ताल है। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण विभागों, बोर्ड, निगमों, विश्वविद्यालयों, नगर निगमों, परिषदों, पालिकाओं में लोगों को काम कराने में कठिनाई हुई। बैंक, बीमा, डाक, तार भूजल बोर्ड सहित अनेक केंद्रीय विभागों के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि पब्लिक डीलिंग, सफाई व बिजली निगम के शिफ्ट में कार्यरत तकनीकी कर्मचारी रविवार रात 10 बजे से ही हड़ताल पर चले गए हैं। इसलिए बिजली आपूर्ति की शिकायतों व बिलों को ठीक नहीं किया जा सका। आंगनबाड़ी, आशा व मिड-डे मील कर्मियों ने भी हड़ताल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हड़ताली कर्मचारियों एवं मजदूरों ने जिला मुख्यालयों, खंड स्तर पर एकत्रित होकर शहरों में जुलूस निकाला और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
संघ के मुख्य संगठनकर्ता धर्मबीर फोगाट व प्रेस सचिव इंद्र सिंह बधाना ने कहा कि सरकार की निजीकरण की नीतियों, कर्मचारियों की छंटनी, जनवादी एवं जनतांत्रिक अधिकारों पर किए जा रहे हमलों और कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान न करने से नाराज कर्मियों ने हड़ताल के जरिये रोष प्रकट किया है। पुरानी पेंशन योजना तुरंत बहाल की जाए। मंगलवार को हड़ताल की समाप्ति पर आगामी आंदोलन का एलान किया जाएगा। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा ने कहा कि 90 प्रतिशत कर्मचारियों ने एकजुटता का परिचय दिया है। रोडवेज का निजीकरण नहीं होने देंगे। सरकार किलोमीटर व स्टेज कैरिज स्कीम को रद्द करे।
हड़ताल का नहीं दिखा अधिक असर : दहिया
परिवहन विभाग के महानिदेशक डॉ. विरेंद्र दहिया ने कहा कि हड़ताल का रोडवेज में अधिक असर नहीं दिखा। अंबाला डिपो की 125, भिवानी की 43, चंडीगढ़ की 59, चरखी दादरी की 16, दिल्ली की 35, फरीदाबाद की 7, फतेहाबाद की 65, गुरुग्राम क ी 36, हिसार की 43, जींद की 66, झज्जर डिपो की 154, कुररुक्षेत्र की 68, कैथल की 96, करनाल की 119, नूंह की 80, नारनौल की 116, पानीपत की 44, पलवल की 8, पंचकूला की 104, रोहतक की 78, रेवाड़ी की 72, सोनीपत की 60, सिरसा की 18, यमुनानगर की 52 बसें सड़कों पर उतरी हैं।