चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य चुनाव आयोग लंबित चुनाव को रद्द नहीं कर सकता है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं पर केवल न्यायाधिकरण ही निर्णय ले सकता है। न्यायाधिकरण भी चुनाव केवल तभी रद्द कर सकता है जब नामांकन अनुचित रूप से खारिज किया गया हो। फिरोजपुर जिले के चक हराज गांव के पंचायत चुनाव को रद्द करने के पंजाब चुनाव आयोग के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। यह याचिका सिमरनप्रीत कौर ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चक हराज गांव में पंचायत चुनाव को मनमाने ढंग से रद्द कर दिया गया।
अन्य लोगों के नामांकन रद्द होने के बाद वह सरपंच पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार बची थीं। पंच और सरपंच पद के उम्मीदवारों ने राज्य चुनाव आयोग से गुहार लगाई थी कि उनके नामांकन पत्र रिटर्निंग अधिकारी द्वारा दुर्भावनापूर्वक रद्द कर दिए गए हैं, इसलिए चुनाव पर रोक लगाई जानी चाहिए। इसके बाद आयोग ने चुनाव रद्द करने का आदेश दिया था। कौर ने तर्क दिया कि जब चुनाव पहले से ही निर्धारित है, तो राज्य चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसलिए, उन्हें निर्विरोध उम्मीदवार होने के नाते सरपंच घोषित किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग ने 1994 के अधिनियम की धारा 11 और 12 के तहत राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र को गलत तरीके से ग्रहण किया है, साथ ही विवाद (विवादों) पर अधिकार क्षेत्र को भी गलत तरीके से ग्रहण किया है। न्यायालय ने कहा कि चुनाव को न्यायाधिकरण की ओर से केवल तभी शून्य घोषित किया जा सकता है, जब नामांकन पत्र अनुचित तरीके से खारिज कर दिया गया हो। हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग की ओर से पारित आदेश को रद्द कर दिया और याची को गांव का निर्विरोध सरपंच घोषित करने का निर्देश दिया है।