चंडीगढ़। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश में अधिक से अधिक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ‘नेट एसजीएसटी के बदले निवेश सब्सिडी’ की योजना तैयार की है। इसके तहत एमएसएमई लेकर से अल्ट्रा-मेगा प्रोजेक्टों तक सभी को यह सब्सिडी दी जाएगी।
दुष्यंत चौटाला ने बताया कि पूरे राज्य में अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स को ‘हरियाणा उद्यम संवर्धन बोर्ड’ द्वारा प्रोत्साहन के लिए अनुकूलित पैकेज की पेशकश की जाएगी। इसी बोर्ड द्वारा ही ‘नेट एसजीएसटी के बदले निवेश सब्सिडी’ की मात्रा और अवधि तय की जाएगी। समान आर्थिक गतिविधियों में लगे ऐसे कलस्टर, जिसमें कम से कम 10 उद्यम शामिल हों, जो अन्य देशों/राज्यों से हरियाणा में स्थापित या स्थानांतरित हो रहे हों, तो उन सभी को मिलाकर एक मेगा प्रोजेक्ट के रूप में माना जाएगा। बशर्ते कि यह ‘फिक्सड कैपिटल इन्वेस्मैंट’(एफसीआई) के मानदंडों को पूरा करता हो। ‘कॉस्ट बैनिफिट एनालिसिस’ के आधार पर इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए ‘हरियाणा उद्यम संवर्धन बोर्ड’ द्वारा प्रोत्साहन के रूप में एक विशेष पैकेज तय किया जाएगा।
यूं मिलेगा योजना का लाभ
‘नेट एसजीएसटी के बदले निवेश सब्सिडी’ योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा ‘डी-कैटेगरी’ वाले खंड में लगाए जाने वाले उद्योग को पहले 5 वर्षों के लिए ‘नेट एसजीएसटी’ का 75 प्रतिशत, अगले 3 वर्षों के लिए 35 प्रतिशत दिया जाएगा। इसी प्रकार, ‘सी-कैटेगरी’ वाले खंड में लगने वाले उद्योग को पहले 5 वर्षों के लिए ‘नेट एसजीएसटी’ का 50 प्रतिशत,अगले 3 वर्षों के लिए 25 प्रतिशत (फिक्सड कैपिटल इन्वेस्टमैंट का अधिकतम 100 प्रतिशत) और ‘बी-कैटेगरी’ वाले खंड में लगने वाले उद्योग को पहले 5 वर्षों के लिए ‘नेट एसजीएसटी’ का 30 प्रतिशत, वाणिज्यिक उत्पादों के निर्माण शुरू होने से अगले 3 वर्षों के लिए 15 प्रतिशत दिया जाएगा।
5 प्रतिशत तक सब्सिडी
जिन मेगा प्रोजेक्ट्स में ‘इन्वर्टिड ड्यूटिज’ होंगी, उनमें 8 साल की अवधि तक समान वार्षिक किश्तों में एफसीआई के 5 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। यह किसी मेगा प्रोजेक्ट के लिए अधिकतम 5 करोड़ की वार्षिक सीमा होगी। जिन मामलों में नकद खाता-बही के तहत एक वर्ष में ‘नेट एसजीएसटी’ एफसीआई के 5 प्रतिशत से कम है, वहां पर भी 8 साल की अवधि तक समान वार्षिक किश्तों में एफसीआई के 5 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी।