फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panchkula: कोरोना काल ने जिंदगी से जंग लड़ना सिखाया, पंचकूला की बेटियों ने खेल से बना ली अपनी किस्मत

Tue, 24 Jan 2023 11:38 AM IST
निवेदिता वर्मा अमर उजाला/संवाद, पंचकूला

सार

पंचकूला सेक्टर-20 फतेपुर गांव की रहने वाली बिजनेश 2018 से वुशू प्रतियोगिता के अलग-अलग इवेंट में हिस्सा ले रही हैं। उसके पिता जोगिंदर सिंह मजदूर हैं। उसने बताया कि घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चल पाता है, लेकिन हम लोगों का हौसला मेरे पिता ने कभी कम नहीं होने दिया।
विज्ञापन
रंजन और बिजनेश - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगे बढ़कर देश के लिए कुछ करने की बहुत इच्छा है, लेकिन रास्ते दिख नहीं रहे थे। दो वक्त की रोटी के लिए पिता को सुबह से शाम तक मशक्कत करनी पड़ती है। तब जाकर घर में सुबह और शाम को चूल्हा जलता है। ऐसे में सपने मन में दफन होने लगे थे। जब थोड़े समझदार हुए तो पता चला कि हरियाणा में खेल के जरिए हम आगे बढ़ सकते हैं।

विज्ञापन


हिम्मत कर ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में वुशू की ट्रेनिंग के लिए पहुंचे। अभी कुछ दिन ही बीते थे कि कोरोना काल ने दस्तक दे दी। कई दिन ऐसे भी बीते, जब घर में चूल्हा भी नहीं जला, लेकिन इस बीच कोरोना ने जिंदगी से जंग लड़ना सीखा दिया। यह कहना है वुशू की नेशनल खिलाड़ी बिजनेश और रंजन कुमारी का। वक्त ने ऐसा चक्र चलाया कि महज 15 और 17 साल की उम्र में दोनों बेटियों ने परिवार की जिम्मेदारी भी उठाना शुरू कर दिया है। ये दोनों बेटियां खेल अवार्ड और स्कॉलरशिप से मिले पैसों से अपने पिता का सहयोग भी कर रही हैं।

मजदूर की बेटी बोली, लक्ष्य के लिए लगन चाहिए
पंचकूला सेक्टर-20 फतेपुर गांव की रहने वाली बिजनेश 2018 से वुशू प्रतियोगिता के अलग-अलग इवेंट में हिस्सा ले रही हैं। उसके पिता जोगिंदर सिंह मजदूर हैं। उसने बताया कि घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चल पाता है, लेकिन हम लोगों का हौसला मेरे पिता ने कभी कम नहीं होने दिया। आज उसी का नतीजा है कि 2020 में नेशनल में कांस्य पदक जीतने के बाद सरकार की तरफ से नकद इनाम 75 हजार रुपये मिले थे। 2021 का अभी फरवरी में मिलने वाला है। वहीं हर माह दो हजार रुपये स्कॉलरशिप के रूप में भी मिलता है। इन पैसों से डाइट के साथ-साथ अपने पिता का हाथ भी बंटाती हूं। आगे देश की सेवा करना चाहती हूं। इसलिए आईटीबीपी ज्वाइन करुंगी। बिजनेस ने बताया कि वह सेक्टर-6 के गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 9वीं की छात्रा है। सेक्टर-3 के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में कोच अभिलाष सक्सेना के पास वुशू की ट्रेनिंग कर रही हैं।

विज्ञापन

टेलर की बेटी ने कहा, वुशू को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक लेकर जाऊंगी
रंजन 2020 से लगातार वुशू प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही हैं। घर चलाने के लिए रंजन के पिता दिनेश टेलर का काम करते हैं। रंजन ने बताया कि स्टेट में पहली बार 31 हजार रुपये कैश प्राइज मिले थे। उसने पूरा पैसा ले जाकर अपने पिता के हाथों में रख दिया था। रंजन ने बताया कि उसके पिता की आंखें भर आई थीं, उन्होंने गले लगा लिया। तब पता चला कि हमारे पिता हम लोगों को पालने के लिए कितना परिश्रम करते हैं। उसी दिन पिता का आशीर्वाद लिया। उन्हें वचन दिया था, जल्द नेशनल में पदक लाकर लाखों रुपये का कैश प्राइज अपने पिता के हाथ में लाकर रखेंगी।

वह मौका आया, 2022 में अंडर-17 आयुवर्ग में रंजन कुमारी ने वुशू के इवेंट नन क्वान स्टाइल में स्वर्ण पदक जीता है। इसके लिए फरवरी में प्रदेश सरकार की तरफ से 2.25 लाख रुपये मिलेंगे। रंजन ने बताया कि आगे बढ़ने के लिए पैसा जरूरी है, लेकिन सही लक्ष्य के साथ परिश्रम बेहद जरूरी है। रंजन आगे चलकर सरकारी कोच बनना चाहती है और वुशू को प्रमोट करना चाहती है। ताकि उसके जैसी तमाम लड़कियों को सही दिशा मिले और वे आगे आएं और पैसों की कमी की वजह से उन्हें घर बैठना न पड़े। रंजन सेक्टर-20 संस्कृति मॉडल स्कूल में 11वीं की छात्रा है।
विज्ञापन

महज 13 साल में नविशा पहुंचीं राष्ट्रीय स्तर पर, तलवारबाजी में बटोर रहीं पदक
सेक्टर-15 निवासी नविशा भारद्वाज महज 13 साल की हैं लेकिन तलवारबाजी जैसे खेल में वह राज्य राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। अब उनका सपना ओलंपिक में देश के लिए मेडल हासिल करना है।



नविशा ने राष्ट्रीय स्तर पर दो पदक जीते हैं। 10 से 13 जनवरी तक केरल में राष्ट्रीय स्तर की तलवारबाजी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसके फोइल टीम इवेंट में नविशा ने स्वर्ण पदक और एकल मुकाबले में कांस्य पदक हासिल किया। राज्य स्तर पर भी वह अंडर-17 और अंडर-14 में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।

सुबह से लेकर दोपहर तक स्कूल में पढ़ाई के बाद शाम को नविशा ढाई घंटे तलवारबाजी का अभ्यास करती हैं। पिता राजीव ही उनके कोच हैं। नविशा अभी आठवीं कक्षा में हैं। सातवीं में उनके 85 प्रतिशत अंक आए थे। नविशा ने बताया कि खेल के स्तर को सुधारने के लिए वह रोज अपने से बड़े खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करती हैं। नविशा के पिता राजीव कुमार तलवारबाजी के फोइल मुकाबलों के इंटरनेशनल रेफरी हैं। दिसंबर 2022 में थाईलैंड में आयोजित हुए फेंसिंग वर्ल्ड कप में भी वह रेफरी बनकर गए थे। नविशा की मां शिप्रा निजी स्कूल में अध्यापिका हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें