पंचकूला। रविवार को महापौर सम्मेलन में हरियाणा की ओर से स्वच्छता रैंकिंग में सुधार को लेकर मुद्दा उठ सकता है, क्योंकि पिछले कई सालों से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की नगर निगम कवायद ही कर रहा है। नतीजा स्वच्छता रैंकिंग में हर बार पंचकूला अच्छा रैंकिंग नहीं ला पा रहा है। पंचकूला के झूरीवाला में करीब 13.24 एकड़ जमीन में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट 61 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना था। ऐन मौके पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दौरे के बाद डंपिग ग्राउंड की साइट झूरीवाला की जगह भानू के पास ले जाने की चर्चा तेज हो गई। तब से यह प्रोजेक्ट डिब्बा बंद है। अगर पंचकूला में प्लांट लग जाता है तो पंचकूला को स्वच्छता रैंकिंग में सीधे करीब 1000 नंबरों का फायदा होगा।
घग्गर नदी को कर रहा प्रदूषित
साॅलिड वेस्ट ट्रीटमेंट एंड डिस्पोजल प्लांट सही जगह पर स्थापित नहीं किया गया है। यह वन्य जीव क्षेत्र, वन या नगर निगम क्षेत्र से कम से कम एक किलोमीटर की दूरी पर होनी चाहिए। जांच में साबित हुआ है कि डंपिंग साइट से निकलने वाला लीचेट बारिश के पानी के साथ घग्गर नदी में मिल जाता है। इससे पानी बहुत ज्यादा प्रदूषित हो रहा है। प्रदूषण बहुत ज्यादा होने के कारण एक जुलाई 2022 से 31 अगस्त 2022 तक पांच लाख रुपये प्रति महीना का जुर्माना भी लगाया था।
20 करोड़ से ज्यादा का लगाया जुर्माना
झूरीवाला से डंपिंग ग्राउंड शिफ्ट नहीं करने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिसंबर 2024 में नगर नगर निगम को दोबारा 20 करोड़ से ज्यादा का जुर्माने का नोटिस भेजा है। इससे पहले एनजीटी के आदेश के बाद क्षेत्रीय अधिकारी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पंचकूला ने 17 अगस्त 2022 को नगर निगम पर नौ करोड़ और कालका नगर परिषद पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, लेकिन दो साल बाद भी नगर निगम ने डंपिंग ग्राउंड को झूरीवाला से दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया। इसे लेकर एनजीटी फिर सख्त हो गया है।
जिले में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट देश का सबसे मॉडर्न प्लांट लगाया जाना था। नौ माह के अंदर प्लांट तैयार करने की योजना थी। इसमें खाद बनाने, कचरा कलेक्शन, ट्रांसपोर्टेशन और प्रोसेसिंग का जिम्मा एजेंसी का ही होता। अगर प्लांट लगता है तो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगने के बाद हर रोजाना 280 टन कचरे का निस्तारण किया जा सकेगा।