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Panchkula News: पंजाब में लगेंगे बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर

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चंडीगढ़। पंजाब में 31 अगस्त तक सभी सरकारी कार्यालयों, कर्मचारियों के सरकारी रिहायशी इलाकों और अन्य विभागों में बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। इसके बाद नवंबर 2025 तक राज्य के औद्योगिक, व्यावसायिक या बिजली के बड़े उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर पर शिफ्ट करने का लक्ष्य दिया गया है।
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यह फैसला शुक्रवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-35 स्थित एक निजी होटल में आयोजित उत्तरी क्षेत्र के राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए क्षेत्रीय विद्युत मंत्रियों का सम्मेलन में हुआ। इस सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने की। बैठक में हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज, पंजाब के बिजली मंत्री हरभजन सिंह, उत्तराखंड़ से वनमंत्री सुबोध उनियाल, यूपी के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद, जम्मू कश्मीर से जावेद अहमद राणा और राजस्थान से ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर उपस्थित रहे।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत की बिजली प्रणाली एक एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड के रूप में विकसित हुई है, जो एक राष्ट्र-एक ग्रिड के दृष्टिकोण को पूरा करती है और देश के विकास को बढ़ावा देने के लिए भविष्य के लिए तैयार, आधुनिक और वित्तीय रूप से व्यवहार्य बिजली क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करती है। मई 2024 में 250 गीगावाट की अधिकतम मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया और भारत बिजली की कमी से बिजली-पर्याप्त राष्ट्र में बदल गया है और अब अधिकतम मांग की कमी शून्य है।
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उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निरंतर सहयोग और समन्वय के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की अधिकतम बिजली मांग 2034-35 तक 446 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है और इसे स्थायी रूप से पूरा करने के लिए केंद्र, राज्यों और हितधारकों के बीच सक्रिय योजना और निरंतर समन्वय की आवश्यकता है।

राज्यों को 1.5 लाखा करोड़ रुपये का आवंटन
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि राज्यों को अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन परियोजनाओं के विकास में आने वाली समस्याओं को हल करने की दिशा में काम करना चाहिए, जिसमें आरओडब्ल्यू मुद्दे भी शामिल हैं। राज्यों को बहुपक्षीय संस्थानों सहित वित्तपोषण के लिए विविध विकल्पों की तलाश करनी चाहिए। उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि केंद्रीय बजट 2025-26 में राज्यों के पूंजीगत व्यय का समर्थन करने के लिए 50 वर्षीय ब्याज मुक्त ऋणों में 1.5 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो ट्रांसमिशन के बुनियादी ढांचे को अत्यधिक मजबूत कर सकता है।
राज्यों को भंडारण समाधानों के साथ अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहिए ताकि बिजली की आपूर्ति की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि भारत कुल संस्थापित क्षमता में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और यह 2014 में 32 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल 2025 में 49 प्रतिशत हो गई है।
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