यह भी पता चला है कि रावत के साथ मुलाकात के दौरान कैप्टन ने उन्हें बातों-बातों में साफ कर दिया कि भले ही उन्होंने हाईकमान की हर बात मान ली है, लेकिन सिद्धू का मामला हाईकमान द्वारा सही ढंग से नहीं निपटाया गया।
कैप्टन ने सिद्धू को प्रधान के तौर पर तो स्वीकार कर लिया है लेकिन उनके साथ वे कोई बातचीत करने को तैयार नहीं हैं। कैप्टन ने रावत से यह भी कहा है कि वे उनकी इस शर्त को हाईकमान तक पहुंचा दें।
उधर, कैप्टन के इस नए रुख से रावत पसोपेश में हैं। एक ओर तो वे कैप्टन-सिद्धू के बीच सुलह कराकर पंजाब कांग्रेस का विवाद सुलझाने का श्रेय लेने की तैयारी कर रहे थे, वहीं कैप्टन ने सिद्धू के प्रति अपनी नाराजगी जताकर गेंद को फिर से रावत के पाले में डाल दिया है जो सिद्धू को लंबे समय से प्रदेश कांग्रेस में बड़ी जिम्मेदारी देने के पक्षधर रहे और अपने पंजाब प्रवास के हर मौके पर सिद्धू से मिलते भी रहे हैं। अब रावत के लिए जरूरी हो गया है कि वे सिद्धू को कैप्टन की नाराजगी दूर करने के लिए मनाएं, ताकि झगड़ा खत्म हो सके।