पंचकूला। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से महज 200 मीटर की दूरी पर स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें बिक रही हैं। शिक्षा विभाग को इसकी भनक तक नहीं है। इसका खुलासा वीरवार को अमर उजाला के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ है। सेक्टर-7 में दो स्कूल परिसर में सरेआम वेंडर किताबों के सेट का रेट लगा रहे थे। जब विभाग से इस बाबत सवाल किया गया तो जवाब मिला कि स्कूलों की जांच के लिए वीरवार को कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी के पदाधिकारी शुक्रवार से स्कूलों की जांच करेंगे और उसके बाद उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बता दें कि स्कूलों में नियमों का ताक पर रखकर किताबें हर साल बेची जाती हैं। इससे पहले भी पंचकूला शहरी क्षेत्र के कई स्कूलों में वेंडर किताबें बेचते पकड़े गए हैं। विभाग महज स्कूलों को नोटिस देने तक सीमित है।
एक स्कूल रिपोर्टर - मैम तीसरी कक्षा की किताब चाहिए ।
मैडम -नोट बुक के साथ किताब चाहिए या महज बुक सेट ।
रिपोर्टर -बिना नोट बुक के सेट का कितना पैसा लगेगा।
मैडम- 3890 रुपये किताब सेट का चार्ज देना होगा ।
रिपोर्टर- नोट बुक के साथ किताबों के सेट का कितना चार्ज होगा ।
मैडम- 4450 रुपये देने पड़ेंगे ।
रिपोर्टर - किताब अभी उपलब्ध हो पाएगा ।
मैडम - पहले अभी पैसे का भुगतान कर दो, उसके बाद कल सुबह क्लास रूम में बच्चे को किताबों समेत नोट बुक दे दी जाएंगीं
रिपोर्टर -किताब सेट का भुगतान ऑनलाइन कर दूं।
मैडम - स्कूल के ठीक सामने एटीएम है, वहां से कैश निकालकर दे दो।
दूसरा स्कूल
रिपोर्टर - मैम किताब चाहिए।
मैडम - मिल जाएगा, किस कक्षा के लिए।
रिपोर्टर - चौथी कक्षा की चाहिए, बुक सेट का रेट बता दीजिए।
मैडम - स्कूल में बच्चे का दाखिला हो गया है।
रिपोर्टर - अभी नहीं दाखिले की प्रक्रिया चल रही है, मैम पहले किताब का रेट बता दीजिए।
मैडम -किताबों के सेट का दाम 6450 रुपये है, इसमें पंजाबी की किताब नहीं है, इसको बच्चे को बाद में दे दिया जाएगा।
जिले के एक भी स्कूल को किताबें, वर्दी बेचते पाया गया तो स्कूल पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कमेटी गठित की गई है। शुक्रवार को पंचकूला सेक्टर-7 के सभी स्कूलों की जांच होगी। स्कूल परिसर में किताबें बेचते पाए गए तो उचित कार्रवाई की जाएगी। - सतपाल कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी पंचकूला।
जिला शिक्षा विभाग निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें बेचने में हमेशा असफल रहा है। आज तक किसी भी स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। गत वर्षो में कुछ स्कूलों में जिला शिक्षा अधिकारी ने स्वयं छापा मारकर किताबें बेचते हुए स्कूल पकड़े हैं। आज भी जिला शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते निदेशालय के आदेशों की पालना नहीं हो पा रही है। हर बार कार्रवाई के नाम पर कमेटी बनाकर बात खत्म कर दी जाती है। भारत भूषण बंसल, चेयरमैन, पेरेंट्स एसोसिएशन।