एसईटी की पावर तो नहीं बढ़ी अलबत्ता सरकार ने एसईटी में खिरवार का नाम किनारे कर अकील मोहम्मद का नाम शािमल कर लिया है। पहले भी विज ने एसईटी के गठन के समय यह कोशिश की थी कि आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की अध्यक्षता में एसईटी गठित की जाए लेकिन सरकार ने टीसी गुप्ता पर भरोसा जताया। इस बार विज संदीप खिरवार को चाह रहे थे, लेकिन इस बार भी उनकी नहीं चली।
सेक्शन 32 के तहत पावर चाहते थे विज
दरअसल इस पूरे मामले में एसईटी को एसआईटी बनवाने के लिए अनिल विज प्रयत्नशील थे। एसआईटी बनती तो उसे आरोपियों से पूछताछ की पावर मिल जाती, लेकिन कानूनी दांवपेंच आड़े आ गए।
सीआरपीसी के सेक्शन 32 के तहत विज ने पावर देने की अपील की थी, लेकिन सीआरपीसी का सेक्शन 36 आड़े आ गया और विधि परामर्शी ने राय देने से मना कर दी। सेक्शन 36 के तहत आरोपी से पूछताछ की पावर एसएचओ को होती है। बाद में इस मामले में महाधिवक्ता से राय मांगी गई। वहां से भी अनिल विज के अरमानों पर पानी फेर दिया गया।