हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा ने मंगलवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यमुना के प्रदूषित पानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यमुना नदी, गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है, जिससे कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं। बावजूद इसके हरियाणा सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। यमुना का पानी पीने और कृषि के लिए उपयोग होता है।
यमुना नदी के गैर उपचारित पानी के निर्वाह को समाप्त करने के लिए हरियाणा सरकार को 31 दिसंबर 2020 तक का समय एनजीटी ने दिया हुआ है। लेकिन, सरकार अभी तक उस दिशा में आगे नहीं बढ़ रही। नदी का पानी प्रदूषित होने से कृषि और सिंचाई के माध्यम से हमारा फूड चेन प्रदूषित हो रहा है। भारत में वर्ष 2030 तक स्वच्छ पानी के एजेंडे को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जो मौजूदा हालत में प्रदूषित नदियों की स्थिति को देखकर बिल्कुल भी संभव नहीं लगता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी 2018 की रिपोर्ट में 351 प्रदूषित नदियां चिन्हित की थी। यमुना नदी उत्तर भारत में पानी का मुख्य स्त्रोत है। जो हरियाणा से होकर गुजरती है। जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार नमामि गंगे के अंतर्गत यमुना नदी को साफ करने के लिए वर्ष 2011 से लेकर अभी तक दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के लिए स्वीकृत राशि 2590.52 करोड़ थी। जबकि, अभी तक केवल 649 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं।
इससे साफ है कि 75 प्रतिशत राशि अभी जारी ही नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 25 में से अभी तक दो ही प्रोजेक्ट मंजूर हुए हैं। इसके अलावा यमुना एक्शन प्लान चरण 1 और 2 के लिए भी बहुत ही कम खर्च हुआ है। एनजीटी ने वर्ष 2018 के सितंबर माह में राज्यों को आदेश दिया था कि वह प्रदूषण के स्रोतों की जांच कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर रिवर रिजुवेनेशन कमेटी का गठन करें। मगर, अभी तक इस विषय में कोई भी ठोस कार्य नहीं हुआ है।