कोरोना के कारण स्कूल बस के ड्राइवरों समेत अन्य सहायक स्टाफ बेहाल हो गया है। स्कूल के ड्राइविंग स्टाफ को स्कूल द्वारा सपोर्ट तो किया जाता है पर सीमित संसाधनों तक। ऐसी स्कूल में ज्यादातर ड्राइवर और कंडक्टर अब रोजगार तलाश रहे हैं।
एक साल से स्कूलों के बंद होने से पंचकूला में ड्राइविंग, मेंटेनेंस और अन्य सर्पोटिंग स्टाफ के लिए मुश्किल हालात बन चुके हैं। हालात यह है कि इस स्टाफ को अब नौकरी भी नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं, स्कूल में जो स्टाफ ऑन काल बुलाया जाता था, उनके लिए कोई भी सपोर्ट नहीं है। इस प्रकार के स्टाफ ने दिहाड़ी करना शुरू कर दिया है।
पंचकूला के एक स्कूल के डायरेक्टर जीवतेश गर्ग ने बताया कि स्कूल के सपोर्टिंग स्टाफ को स्कूल सपोर्ट कर रहा है। उन्होंने कहा कि जो सदस्य स्टाफ में नहीं थे उनकी मदद भी यदा कदा कर दी जाती है। गुरुकुल स्कूल के चेयरमैन संजय थरेजा ने कहा कि स्कूल द्वारा स्टाफ को सपोर्ट करने की व्यवस्था की गई है। स्कूल ने लॉकडाउन के दौरान भी उनको सपोर्ट किया और अब भी कर रहा है।
चौकीदार की नौकरी ही मिल जाए
मेरी तीन बसें हैं। अब तो मुझको चौकीदार की नौकरी ही मिल जाए तो अच्छा है। मैं करीब एक साल से घर में बैठा हूं। जिसकी वजह से मेरी समस्याएं बढ़ती चली जा रही हैं। स्कूल बस चलती थी तो घर का खर्च चल जाता था, अब तो किसी तरह से काम चल रहा है। स्कूल से मुझको थोड़ी सपोर्ट मिल जाती है।
-हरनाम सिंह, स्कूल बस ड्राइवर
घर खर्च बामुश्किल चल पाता है हमारा
मेरी चार बसें हैं। यह बसें एक ही स्कूल में लगाई थीं। अब एक साल से ज्यादा का समय हो गया है। घर का खर्च अब बड़ी मुश्किल से चलता है। पहले सोचा कि सब्जी का ठेला लगा लूं पर वह हो नहीं सका। अब समझ नहीं आता है कि क्या करूं। हमे स्कूल से सपोर्ट दी जाती है।
- रचना राम, स्कूल बस ड्राइवर
स्कूलों को बंद होने के बाद से सभी के हालात काफी ज्यादा खराब हो गए हैं। मेरी बसें चलती थीं और उन बसों के लिए काफी स्टाफ लगाया जाता था। अब यह सारा स्टाफ किसी तरह से अपना गुजारा चला रहा है। कोई सब्जी बेचकर खर्च चला रहा है तो कोई दिहाड़ी करने लगा है।
- गुरमीत सिंह, स्कूल बस ड्राइवर
- पंचकूला में स्कूल बस -150
- स्कूल बस के ड्राइवर - 170
- स्कूल बस के अटेंडेंट - 170
- मेंटेनेंस के लिए स्टाफ - 50