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देश के संस्कारों का आधार है संस्कृत भाषा : राजकुमार मक्कड़

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पंचकूला। श्माता श्री मनसा देवी राजकीय संस्कृत महाविद्यालय पंचकूला की ओर से आयोजित सात दिवसीय आभासीय राष्ट्रस्तरीय ज्योतिष कार्यशाला के समापन सत्र का ऑनलाइन आयोजन किया गया। इस समापन सत्र में बतौर मुख्यातिथि हरियाणा सरकार के दिव्यांगजन पूर्व आयुक्त राजकुमार मक्कड़ उपस्थित रहे। इसका शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा संस्कृत और संस्कारों की धरती है। इस धरा पर हरियाणा सरकार की ओर से संस्कृत के उत्थान के लिए महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल और माता श्री मनसा देवी राजकीय संस्कृत महाविद्यालय पंचकूला की स्थापना करना एक सराहनीय प्रयास है। संस्कृत भारत के संस्कारों का आधार है। गीता की पावनधरा हरियाणा से इस प्रकार के ज्ञान यज्ञ का आयोजन प्रशंसनीय है। उन्होंने महाविद्यालय के इस तरह के आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि यह महाविद्यालय भारत की प्राच्य विद्या के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में महती भूमिका निभा रहा है। मुख्यातिथि ने प्रतिभागियों से संस्कृत एवं ज्योतिष शास्त्र को जन–जन तक पहुंचाने की अपील की।
राष्ट्रीय कार्यशाला के संयोजक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि इस राष्ट्रीय कार्यशाला में संपूर्ण भारत से आभासीय माध्यम से 100 प्रतिभागी भाग लिया है एवं संसाधक (रिसोर्स पर्सन) के रूप में डॉ. कृष्ण चन्द्रशास्त्री, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से डॉ. देशबंधु, डॉ. बृजमोहन, डॉ. जगदीश, महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, मूदंडी से डॉ. नरेशदत्त, डॉ. नवीन शर्मा ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
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प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र ईमेल माध्यम से भेजे जाएंगे। इस उद्घाटन सत्र में प्राचार्या रीटा गुप्ता की ओर से समागत मुख्यातिथि का स्वागत व अभिनंदन किया गया। इस मौके पर मंच संचालन डॉ. राजबीर की ओर से किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार के सदस्य एवं प्रतिभागी आभासीय माध्यम से उपस्थित रहे।
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