रोड स्वीपिंग मशीन चला रहे ड्राइवर के पास नहीं है लाइसेंस, पंचकूला विकास मंच कई बार कर चुका है शिकायत
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सड़कों की धूल को हटाने के लिए नगर निगम ने पहल की थी, इसके लिए चार रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदी थीं। मकसद था कि इससे सड़क पर जमी धूल साफ करेंगे, साथ ही वायु प्रदूषण को भी कंट्रोल करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टा ये मशीनें वायु प्रदूषण के स्तर को शहर में बढ़ा रही हैं और इन मशीनों से सड़कों की सफाई भी प्रॉपर तरीके से नहीं हो पा रही है। इसके अलावा रोड बरम की सफाई के लिए मशीन में पांच मीटर लंबी पाइप लगी है, लेकिन रोड बरम की सफाई कभी नहीं होती। इसका खुलासा शनिवार की रात अमर उजाला की रियलिटी चेक में हुआ है।
दरअसल टीम ने रात करीब 11 से 12 बजे तक औद्योगिक क्षेत्र फेज-2 और सेक्टर-15 की डिवाइडिंग सड़क, सेक्टर-16 और इंदिरा काॅलोनी की डिवाइडिंग सड़क, सेक्टर-16 और 17 की डिवाइडिंग सड़क पर रोड स्वीपिंग से हो रही सफाई की पड़ताल की। सामने आया कि सफाई तो दूर नगर निगम का वाहन चलाने वाले ड्राइवर के पास लाइसेंस तक नहीं था। जिसके पास लाइसेंस था, वह ड्राइविंग सीट के बगल में बैठा था। दूसरा युवक गाड़ी चला रहा था। रहा सवाल सफाई का तो टीम ने पाया कि रोड बरम की मशीन से सफाई भी नहीं की गई। जिस रास्ते पर मशीन सफाई कर रही थी, वहां सफाई के बाद भी सड़कों के किनारों पर धूल और मिट्टी जमा हुआ था।
एनजीटी के नियम बेमानी
गौरतलब है कि एनजीटी का नियम है कि धूल-मिट्टी डस्ट के ढेर को खुले में न रखा जाए। बाकायदा इसे कवर्ड किया जाए, ताकि यह न उड़े। ग्रेप मॉडल लागू होने के बाद रोड डस्ट का ढेर खुले में लगाकर बेचने वालों पर खुद नगर निगम जुर्माना लगाता है। बावजूद इसके, पंचकूला रोड पर निगम के कर्मचारी ही रोड स्वीपिंग मशीन से निकलने वाली धूल-मिट्टी को हवा में उड़ा रहे हैं। यहां मशीन से पानी गिराया ही नहीं जाता। ताकि धूल को हवा में उड़ने से रोका जा सके।
हर माह 18 लाख रुपये किराया
हर माह नगर निगम रोड स्वीपिंग मशीन के किराए पर करीब 18 लाख रुपये खर्च करता है। उसके बाद स्वीपिंग मशीन में डीजल, जाली, ब्रश की मरम्मत पर हर माह अगल से खर्च किया जाता है। यह मशीन इसलिए हायर की गई थी कि कई सफाई कर्मचारियों का काम अकेले ही कर पाती है। वर्ष 2018 में इसका सड़कों पर ट्रायल लिया गया था। गत वर्ष यह मशीन नगर निगम को मिल गई थी। निगम अधिकारियों की माने तो दिन व रात में स्वीपिंग मशीन करीब 36 किलोमीटर सड़कों की रोजाना सफाई कर रही है। यदि रोजाना इतनी सड़कों की सफाई हो रही है तो लोग धूल क्यों फांक रहे हैं। बरम की तरफ सड़क की सफाई करने के लिए नगर निगम के सफाई कर्मचारियों को लगाना पड़ता है। इस तरह एक सड़क पर मशीन भी लग रही है और सफाई कर्मचारी भी।
टूटी सड़कों पर कामयाब नहीं
स्वीपिंग मशीन न तो टूटी सड़कों पर कामयाब है और न ही यह बरम की तरफ वाले सड़क के हिस्से की सफाई कर पाती है। यह केवल डिवाइडर के साथ ही सफाई कर सकती है। जबकि सच्चाई ये है कि डिवाइडर की तरफ सड़क पर न के बराबर मिट्टी होती है। सबसे ज्यादा मिट्टी बरम की तरफ होती है। क्योंकि वाहनों के चलने से बरम की मिट्टी सड़क पर आ जाती है। इस तरह जहां मिट्टी है वहीं सफाई करती। स्वीपिंग मशीन के अगले पहियों के पीछे ब्रश लगे हैं जो घूमते हुए सड़क पर जमी धूल को उड़ाते हैं। इनके पीछे लगे वेक्यूम प्रेशर उड़ने वाली धूल को खींच कर टैंक तक पहुंचाते हैं। परंतु वेक्यूम केवल उसकी धूल को ही खींच पाते हैं जो गाड़ी के नीचे होती है। टूटी सड़कों पर तो यह मशीन बिल्कुल भी काम नहीं करती।
रोड स्वीपिंग मशीन से जुड़ा मामला मेरे संज्ञान में आ गया है। सोमवार को मामले की जांच करवाऊंगा। खामी पाए जाने पर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - अपूर्व चौधरी, डीएमसी नगर निगम पंचकूला।
विकास मंच पंचकूला आयुक्त को पहले भी अवगत करा चुका
विकास मंच पंचकूला के पदाधिकारी राकेश अग्रवाल और देव राज शर्मा ने बताया कि 16 जनवरी और 5 अप्रैल 2024 को नगर निगम आयुक्त सचिन गुप्ता को सड़कों की सफाई के लिए लगाई गईं रोड स्वीपिंग मशीनों के बारे में अवगत करा चुके हैं। इन रोड स्वीपिंग मशीनों से प्रॉपर सफाई नहीं हो रही है। 18 लाख रुपये हर माह बर्बाद हो रहा है, लेकिन इसपर अबतक विभाग ने ध्यान नहीं दिया। इसके अलावा इन मशीनों से सफाई का शेड्यूल भी सार्वजनिक नहीं किया जाता।