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डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया होगी तेज

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चंडीगढ़। कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया तेज की जाएगी। कर्मचारियों को संवेदनशील बनाने के साथ स्टाफ का युक्तिकरण किया जाएगा।
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स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में वीरवार को यहां हुई प्रशासनिक सचिवों व चिकित्सा अधिकारियों की बैठक में यह निर्णय लिए गए। उन्होंने डेल्टा प्लस वैरिएंट के प्रसार को रोकने के लिए भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कोविड से संबंधित सभी चिकित्सा उपचार संसाधनों वेंटिलेटर बेड, ऑक्सीजनयुक्त बेड, आईसीयू बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर और कंसंट्रेटर की उपलब्धता, रेमडेसिविर इंजेक्शन, एम्फोटेरिसिन, टोसिलिजुमैब की बारीकी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के उपचार के लिए किसी भी उपकरण या दवा की कमी नहीं रहनी चाहिए।
बैठक में स्वास्थ्य एवं गृह मंत्री अनिल विज भी मौजूद रहे। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने लॉजिस्टिक्स, अस्पतालों में उपलब्ध वर्तमान सुविधाओं, दवाओं के स्टॉक, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, बेड और भविष्य के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारी से संबंधित एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आईसीयू बेड, वेंटिलेटर बेड और ऑक्सीजनयुक्त लैस बेड, आवश्यक दवाओं, नवजात के वेंटिलेटर और बच्चों के वेंटिलेटर की वर्तमान उपलब्धता की स्थिति की जांच करने के लिए कहा। कोविड-पीडियाट्रिक मामलों के संबंध में मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन मामलों के इलाज के लिए आवश्यक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा तैयार करें।
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मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि राज्य की मौजूदा 20 सरकारी परीक्षण प्रयोगशालाओं में प्रतिदिन 24500 टेस्ट और 22 निजी प्रयोगशालाओं में प्रतिदिन 71900 टेस्ट करने की क्षमता है। अप्रैल 2021 में सेनिटेल सर्विलांस की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत 15 दिन में प्रत्येक सेनिटेल साइट से 15 नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे जा रहे हैं। पीजीआईएमएस रोहतक में शीघ्र ही जीनोम टेस्ट के लिए प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। बैठक में बताया गया कि हरियाणा में कोविड-19 से मृत्यु दर 1.23 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय मृत्यु दर 1.6 प्रतिशत है।
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