चंडीगढ़। रूह जब दिल में आए तो गजल होती है। टैगोर थियेटर के ऑडिटोरियम में गूंजती रजा मुराद की यह आवाज एक आभास दे रही थी कि अब गजल का कारवां शुरू होने वाला है। गजल का यह कारवां गजल की उत्पत्ति से लेकर अब तक था। इस सफर को पेश किया प्रसिद्ध गजल गायक चंदन दास और राधिका चोपड़ा ने। गजल के इस सफर को रजा मुराद ने शुरू किया। एक ओर वह बताते थे कि पहले गजल कैसी होती थी और दूसरी ओर उसको आवाज देते थे दोनों प्रसिद्ध गजल गायक। इस कार्यक्रम का आयोजन कास्मिकार्ट फाउंडेशन और प्राचीन कला केंद्र के संयुक्त प्रयास से किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान प्राचीन कला केंद्र के चेयरमैन एसके मोंगा, रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर, एसपबीआई पंजाब जीएम सुरेंद्र राणा मौजूद रहे।
चंदन दास ने डॉ. बशीर बदर की लिखी गजल शम्मा जब रोशनी की बात करो, चांद से चांदनी की बात करो, जीने वाले तुम्हें खुदा की कसम मौत से जिंदगी की बात करो..इस शेर के साथ ही उन्होंने जब गजल शुरू की न जी भर के देखा न कुछ बात की, हमें आरजू थी मुलाकात की..। यह गजल जैसे ही उन्होंने पेश की ऑडियंस एकदम मंत्रमुग्ध हो गए। इसके बाद राधिका चोपड़ा ने नूरजहां की एक गजल पेश की जिसके बोल थे, वो एक नजर में मुझे पहचान गए हैं, जो बीती है दिल पे मेरे सब जान गए हैं..। इसके बाद रजा मुराद ने बताया कि गजल एक वक्त बादशाहों के लिए होती थी और उनका दिल बहलाती थी, फिर गजल का प्रारूप बदलता चला गया। उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान में गजल दुरनी भाषा में आई। इस दुरनी भाषा की गजल को यहां पर राधिका चोपड़ा ने सुनाया। चंदन दास ने इसके बाद अमीर मिनाई की लिखी गजल सरकती जाए है रुख से नकाब आहिस्ता आहिस्ता.. सुनाकर महफिल में चार चांद लगा दिए। इसके बाद उन्होंने बेजार लखनवी की गजल दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे, वर्मा कसहीं तकदीर तमाशा न बना दे.. पेश कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान चंदन दास ने रजिंश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ गाई। इसके बाद उन्होंने और राधिका चोपड़ा ने स्वर्गीय गायक जगजीत सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए ये दौलत भी ले लो.. गजल सुनाकर सबको भावविभोर कर दिया। राधिका चोपड़ा ने बेगम अख्तर की गजल मुझे इश्क, दीवाना बनाना, अब क्या बताऊं मैं, ये मोहब्बत, तुम अपना रंजोगम जैसी बेहतरीन गजलें सुनाईं। उसके बाद चंदन दास ने हंगामा है क्यों बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है सुनाई कर महफिल को रोमांचक कर दिया। इस कार्यक्रम में हारमोनियम पर नफीस अहमद, बशीर अहमद की बोर्ड पर, अमजद खान तबले पर रहे।
अब एक नए अंदाज में होगी गजल
तबला वादक अमजद खान ने कहा कि वास्तव में गजल का एक बड़ा सफर है। इस सपर को कोई नहीं जानता। इसी वजह से इस प्रोग्राम को प्लान किया गया और इसकी शुरुआत चंडीगढ़ से की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन कई अन्य राज्यों में करने का प्लान है। उन्होंने कहा कि गजल कोे पेश करने का यह नया रूप लोगों को जरूर पसंद आएगा।