पंचकूला। जिले में वीरवार सुबह से लगातार हो रही रिमझिम बारिश से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के वजह से शहरों में जलभराव हुआ तो ग्रामीण क्षेत्रों में नदी और नाले उफन गए। इसके अलावा कालका-शिमला रेल लाइन भी बाधित हो गई। मोरनी में भूस्खलन से रास्ता बंद हो गया। शहर में सड़कों पर दो से तीन फुट तक पानी भर गया। इससे जगह-जगह वाहन बंद हो गए और चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के चलते लोग छुट्टी का आनंद नहीं उठा पाए। ऐसे में उन्होंने परिवार के साथ घर पर ही समय बिताया। कुछ लोग जो घर से निजी कार्य के लिए बाहर निकले थे, उन्हें जगह-जगह भारी पानी भरने कारा घंटों सड़क में फंसे रहना पड़ा।
वहीं, बारिश ने नगर निगम एवं हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के दावों की पोल खोल दी। वहीं, सेक्टर-20 में 11 सितंबर को जिस सड़क का नगर निगम ने पैचवर्क किया था उसमें फिर गड्ढे-ही गड्ढे हो गए। पैचवर्क का मटीरियल बारिश के पानी के साथ बह गया।
सेक्टर-19 ओल्ड हाउसिंग कॉलोनी और हुडा के मकानों में जलभराव से घरों के अंदर पानी घुस गया। कॉलोनी में गलियों ने नहर का रूप ले लिया था। सेक्टर-19 में यह समस्या पहली बार नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी है। लोगों के अनुसार इसे सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया है। जल निकासी का प्रबंध न होने के कारण पानी घरों में घुस गया।
इसको लेकर स्थानीय लोगों में खासी नाराजगी देखने को मिली। सेक्टर-19 से बाहर जाने वाले सभी रास्तों पर दो से तीन फुट तक पानी जमा हो गया था। सेक्टर के खेड़ा मंदिर के पास से बलटाना को जाने वाले रास्ते, फ्लाईओवर के पास निकलने वाले रास्ते पर भी तीन फुट तक पानी भर गया। सेक्टर-11, 15, बस स्टैड, बैला विस्टा, शालीमार चौक, लेबर चौक, सेक्टर-7, 8 चौक पर बरसात से स्थिति देखने वाली थी। चौक से कार निकालने में लोगों के पसीने छूट गए। यह स्थिति शहर की रोड गलियों और सीवरेज लाइन की सफाई न होने से बनी है। इसके लिए स्थानीय लोग नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
बारिश को बर्दाश्त नहीं कर पाई सड़क
सेक्टर-20 की सड़क बरसाती पानी को सहन नहीं कर पाई। निगम द्वारा 11 सितंबर को जिस सड़क पर गड्ढों को भरकर पैचवर्क का काम किया गया था वहां आज फिर गड्ढे हो गए। पैचवर्क का मटीरियल बरसाती पानी के साथ बह गया, जिसके चलते लोगों को एक बार फिर बड़े-बड़े गड्ढों का सामना करना पड़ा। सेक्टर-20 आरडब्ल्यूए के योगेंद्र क्वात्रा और अविनाश मलिक ने बताया कि 83-ए, 84 और 83 के सामने की सड़क का पैचवर्क किया गया था। लेकिन एक बरसात भी नहीं सहे सकी। सड़क के गड्ढे लोगों के लिए खतरा बन गए हैं। जीएच-83, 83-ए और 84 के सामने इंटरलॉकिंग टाइल लगाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं लेकिन निगम अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगने की मांग
बरसात में हर साल लाखों गैलन पानी बर्बाद हो जाता है। जल संचय के लिए पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगने से पानी को बचाकर भूजल स्तर को बढ़ाया जा सकता है। पूर्व नगर परिषद पार्षद वीके सूद ने बताया कि शहर में निगम के पार्कों में जल संचय के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगे हैं। इस वजह से बरसात का पानी संचय नहीं हो रहा है। यदि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लग जाएं तो कोई कमी नहीं रहेगी। शहर में नगर निगम के करीब 250 पार्क हैं। इन पार्को में बच्चों के लिए झूले और बुजुर्गों के लिए बेंच भी लगे हैं। पार्को में बारिश के पानी को संचय करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जाते हैं। इस सिस्टम से बरसात का पानी भूमिगत कर दिया जाता है, ताकि जलस्तर बना रहे। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और नगर निगम को मिलकर एक योजना बनानी चाहिए, ताकि बरसात के पानी को बर्बाद होने से बचाया जा सके।