सरकारी आदेशों की उड़ी धज्जियां, रात 12 बजे के बाद भी चलते रहे पटाखे
लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और रोपड़ एक्यूआई 500 तक पहुंचा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में इस बार दीपावली पर खूब पटाखे चले। इस कारण सोमवार दिवाली की रात पंजाब के अधिकतर शहरों की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुंच गई। रात 8 बजे से हवा खराब होनी शुरू हुई, जो 12 तक गंभीर श्रेणी में पहुंच गई।
लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और रोपड़ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अधिकतम 500 दर्ज किया गया जबकि पटियाला का एक्यूआई 486 तक पहुंच गया। मंडी गोबिंदगढ़ में एक्यूआई 401, बठिंडा में 312 और खन्ना में 272 रहा। 400 से ऊपर का एक्यूआई खतरनाक माना जाता है। एक्यूआई का यह स्तर स्वस्थ लोगों की सेहत पर भी प्रभाव डालता है जबकि बीमार, बुजुर्ग और बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है।
सांस, हृदय या फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए यह स्थिति घातक साबित हो सकती है। सरकारी आदेशों की भी इस दौरान खूब धज्जियां उड़ाई गईं क्योंकि सरकार ने रात दो घंटे सिर्फ ग्रीन पटाखे चालने की अनुमति दी थी। मंगलवार सुबह एक्यूआई में कुछ सुधार देखने को मिला है, लेकिन प्रदेश के प्रमुख शहरों का औसत एक्यूआई खराब ही चल रहा है। अमृतसर में पिछले 24 घंटे में एक्यूआई 224 दर्ज किया गया है। इसी तरह लुधियाना का 271, मंडी गोबिंदगढ़ का 297, पटियाला का 206, जालंधर का 247, बठिंडा का 136, खन्ना का 139 और रोपड़ का एक्यूआई 115 दर्ज किया गया है।
पिछले साल भी दिवाली पर प्रदेश के कई शहरों का एक्यूआई खराब श्रेणी में था। तब अमृतसर का औसत एक्यूआई 350 दर्ज किया गया था जबकि मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना और लुधियाना का 200 से 300 के बीच दर्ज किया गया था। प्रदेश में पटाखे और पराली जलने के साथ ही सड़कों की धूल, उद्योग और वाहनों से उत्सर्जन भी प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा सर्दियों का मौसम शुरू होने के साथ भी एक्यूआई का स्तर बढ़ना शुरू हो जाता है। जब तक आगे बारिश नहीं होती है तब तक एक्यूआई में बदलाव से ज्यादा कुछ राहत देखने को नहीं मिलेगी।
विशेषज्ञों की मानें तो आगे धान की कटाई के साथ पराली जलाने के मामले भी जोर पकड़ेंगे। अगर स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले दिनों में पंजाब में दिल्ली-एनसीआर जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
रात 8 से 10 बजे तक पटाखे चलाने की दी थी अनुमति
सरकार ने दिवाली पर रात 8 से 10 बजे तक ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी थी, बावजूद इसके रात 12 बजे के बाद भी पटाखे चलते रहे। साथ ही सामुदायिक स्तर पर पटाखे जलाने की अपील का भी कुछ खास असर नहीं दिखा। सरकार ने प्रदूषण के हॉटस्पॉट 9 शहरों पर विशेष नजर रखने का फैसला लिया था लेकिन इन शहरों में ही वायु प्रदूषण अधिक रहा।
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एक्यूआई पहले ही खराब था लेकिन पटाखे जलाने के कारण यह वैरी पुअर व गंभीर श्रेणी में चला गया। वायु प्रदूषण से गले में जलन, खराश, सूजन और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही यही अस्थमा के मरीजों के लिए अधिक खतरनाक है।
- रविंद्र खैवाल, प्रोफेसर, पीजीआई