चंडीगढ़। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का चिनाब का पानी पंजाब को नहीं देने का बयान सामने आने के बाद अब पंजाब भी सतर्क हो गया है। पंजाब के 153 में से 115 ब्लॉक डार्क जोन में हैं। इन 115 ब्लॉकों में भूजल स्तर 400 से 500 फीट नीचे चला गया है। हर साल 0.7 मीटर भूजल स्तर नीचे गिर रहा है। ऐसे में अब पंजाब केंद्र के समक्ष पानी का मुद्दा उठाने की तैयारी में है।
सीएम भगवंत सिंह मान केंद्र के समक्ष सिंधु जल समझौते के पूरी तरह निरस्त होने के साथ पाकिस्तान जा रहे पानी में से पंजाब को अतिरिक्त पानी दिए जाने को लेकर पूरा खाका पेश करेंगे।
पंजाब हर साल लाखों मीट्रिक टन गेहूं और धान देश के अनाज भंडार में भरता है। धान की पैदावार में हर साल लाखों क्यूसेक पानी की खपत होती है, जिसके कारण भूजल स्तर नीचे गिर रहा है। इसके एवज में अब पंजाब सरकार राज्य के डार्क जोन को बचाने के लिए अतिरिक्त पानी की मांग करेगा। इसके साथ ही गेहूं और धान की पैदावार के लिए किसानों को विशेष सब्सिडी और फसल विविधीकरण के लिए विशेष पैकेज दिए जाने की मांग भी करेगा।
बीते दिनों जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पंजाब के किसानों से मुलाकात करने पहुंचे थे, तो उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान को जा रहे पानी को अब जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को देने के लिए विकल्प पर काम कर रही है। यह स्पष्ट है कि इस साल के अंत तक केंद्र पाकिस्तान को जा रहे पानी का मुंह उत्तरी राज्यों की ओर मोड़ेगा। इसके लिए पंजाब भी अपनी तैयारी में जुटा है।
सीएम अब्दुल्ला का यह तर्क था कि सिंधु जल संधि के तहत पंजाब के पास पहले से ही पानी उपलब्ध है, जबकि पंजाब पानी की कमी से जूझ रहा है।
पंजाब और हरियाणा के बीच जल विवाद भी इससे ही होगा शांत
सिंधु जल संधि के तहत पानी का जो हिस्सा पाकिस्तान जा रहा है, उसमें से पंजाब और हरियाणा को कुछ हिस्सा देकर ही दो राज्यों का जल विवाद खत्म हो सकता है। बीते दिनों पंजाब और हरियाणा के बीच उपजे जल विवाद की धमक केंद्र तक सुनाई दी थी। केंद्रीय गृह सचिव को इस मसले में हस्तक्षेप करना पड़ा था, लेकिन पंजाब आखिर तक हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के खिलाफ अड़ा रहा। हरियाणा भाखड़ा से अपने हिस्सा का पानी पहले ही इस्तेमाल कर चुका था, जिसके चलते अतिरिक्त पानी की मांग पर यह विवाद उपजा था।