चंडीगढ़। आईएएस अधिकारी पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) और पंजाब ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ट्रांसको) दोनों के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर पदों पर एक समय में काम कर सकते हैं या नहीं इस विषय पर उलझा हुआ एफिडेविट फाइल करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। अधिकारियों के सही जवाब फाइल न करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने पंजाब सरकार को न्याय के हित में जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है।
बेंच ने पिछली सुनवाई पर कहा था कि पीएसपीसीएल और ट्रांसको दोनों ही ऑटोनॉमस बॉडी हैं जिन्हें बिना किसी बाहरी दखल के काम करना है। फिर भी एक आईएएस ऑफिसर एक ही समय में दोनों कॉर्पोरेशन को हेड कर रहे थे और साथ ही प्रिंसिपल सेक्रेटरी (पावर) के तौर पर भी काम कर रहे थे। जस्टिस बराड़ के सामने यह मामला पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन और दूसरे रेस्पोंडेंट्स के खिलाफ सीनियर एडवोकेट अमित झांजी और वकील मनु के भंडारी, एचसी अरोड़ा आदि के जरिये फाइल की गई कई पिटीशन से शुरू हुआ है।
बेंच को बताया गया कि पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड और पंजाब ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ट्रांसको) में बांट दिया गया था। पंजाब सरकार ने बाद में 16 अप्रैल, 2010 के नोटिफिकेशन से पंजाब पावर सेक्टर रिफॉर्म्स ट्रांसफर स्कीम को नोटिफाई किया ताकि एक तीन तरफा एग्रीमेंट के तहत पहले के पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के काम, एसेट्स, प्रॉपर्टीज, अधिकारों, देनदारियों और कर्मचारियों को ट्रांसफर किया जा सके। इस बीच कर्मियों की सेवा को लेकर विवाद पैदा हुआ जो हाईकोर्ट पहुंच गया।
जस्टिस बराड़ ने सुनवाई के दौरान यह भी देखा कि इस मामले में हलफनामे ट्रांसको और पीएसपीसीएएल दोनों के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर अजॉय कुमार सिन्हा और बिजली विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने फाइल किए थे। जस्टिस बराड़ ने कहा कि बेशक पीएसपीसीएएल और ट्रांसको दोनों ही ऑटोनॉमस बॉडी हैं, जिन्हें बिना किसी बाहरी दखल के बिजनेस करने का अधिकार है। एक ही ऑफिसर यानी अजय कुमार सिन्हा दोनों को हेड करते हैं और पंजाब सरकार के पावर डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के तौर पर भी अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी को एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया था।