तीन साल से खाली खजाने का हवाला देकर अपने खर्च कम करने की कोशिशों का दावा करते रही पंजाब सरकार ने इस मामले में पहले मुलाजिमों की ही जेब पर कैंची चला दी है। सरकार ने मुलाजिमों को दिए जा रहे टेलीफोन-मोबाइल भत्ते को लगभग आधा कर दिया है।
हालांकि सूबे के विधायकों, मंत्रियों को टेलीफोन-मोबाइल भत्ते के रूप में हर महीने दिए जा रहे 15000 रुपये में कोई कटौती नहीं की गई है। मुलाजिमों के लिए मोबाइल भत्ते की नई दरें आगामी 1 अगस्त से लागू होंगी।
वित्त विभाग की वित्त परसोनल-2 ब्रांच की ओर से सभी स्पेशल मुख्य सचिवों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, वित्त कमिश्नरों, प्रिंसिपल सचिवों, प्रशासनिक सचिवों, सभी विभागों के प्रमुखों, सभी डिवीजनों के कमिश्नरों को जारी पत्र में कहा गया है कि मोबाइल भत्ते के विषय में वित्त विभाग की ओर से 3 अक्तूबर, 2011 और 23 दिसंबर, 2011 को जारी किए गए आदेशों में आंशिक परिवर्तन किया गया है।
मोबाइल अलाउंस अब इस प्रकार होगा
पंजाब सरकार ने काफी ध्यानपूर्वक विचार करने के बाद यह फैसला लिया है कि राज्य सरकार के सभी मुलाजिमों को दिया जा रहा मोबाइल अलाउंस अब इस प्रकार होगा-
ग्रुप-ए के मुलाजिमों के लिए - 250 रुपये प्रतिमाह
ग्रुप-बी के मुलाजिमों के लिए - 175 रुपये प्रतिमाह
ग्रुप-सी के मुलाजिमों के लिए - 150 रुपये प्रतिमाह
ग्रुप-डी के मुलाजिमों के लिए - 150 रुपये प्रतिमाह
पहले यह मिलता था मोबाइल भत्ता
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा अब तक ग्रुप-ए के मुलाजिमों को 500 रुपये, ग्रुप-बी के मुलाजिमों को 300 रुपये और ग्रुप-सी व डी के मुलाजिमों को 250 रुपये प्रतिमाह की दर से मोबाइल भत्ता दिया जा रहा था। वित्त विभाग ने पिछले महीने मोबाइल भत्ते में कटौती संबंधी एक प्रस्ताव तैयार करके सरकार को दिया था।
मोबाइल भत्ते में कटौती का मुलाजिम संगठनों ने किया विरोध
पंजाब सरकार की ओर से अपने मुलाजिमों के मोबाइल भत्ते में कटौती का फरमान जारी किए जाने के तुरंत बाद मुलाजिमों में रोष फैल गया है। मुलाजिम संगठनों ने राज्य सरकार के फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि मुलाजिम विरोधी इन फैसलों के लिए कड़े जवाब के लिए तैयार रहे।
वित्त विभाग की ओर से सोमवार को जारी किए आदेश के तहत ग्रुप-ए के मुलाजिमों के मोबाइल भत्ते को 50 फीसदी घटाकर अब 250 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इसी तरह ग्रुप-बी मुलाजिमों के भत्ते को भी 300 से घटाकर 175 रुपये पर लाया गया है। ग्रुप-सी व डी मुलाजिमों का भत्ता भी 250 से घटाकर 150 रुपये कर दिया गया है।
सरकार के इस फैसले की निंदा करते हुए डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष भुपिंदर सिंह वड़ैच, महासचिव जर्मनजीत सिंह, वित्त सचिव हरिंदर सिंह दुसांझ और डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दविंदर सिंह पुनिया, महासचिव जसविंदर सिंह झबेलवाली और सीनियर उपाध्यक्ष विक्रम देव सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से कोविड-19 की आड़ में मुलाजिम वर्ग के खिलाफ बड़े व्यापक हमले की कड़ी में अब मुलाजिमों के मोबाइल भत्ते में कट लगाया गया है जो निंदनीय है।
इन नेताओं ने कहा कि पंजाब के मुलाजिम पहले ही विभागीय कामों के लिए हजारों रुपये मोबाइल व इंटरनेट डाटा के लिए अपनी जेबों से खर्च कर रहे हैं। इसके बावजूद पहले से ही बहुत कम दिए जा रहे भत्ते में भी कटौती निंदनीय है। उन्होंने चेतावनी दी कि मुलाजिम विरोधी इन फैसलों के लिए कड़े जवाब के लिए तैयार रहना चाहिए।