पीयू स्टूडेंट सेंटर स्थित दो दुकानें सील करने को लेकर शुक्रवार को हंगामा हो गया। छात्र नेताओं और पुलिस में पहले नोकझोंक हुई। मामला इतना बढ़ा की हाथापाई हो गई। मामला कुछ देर के लिए शांत हुआ, लेकिन छात्रों में फिर उबाल आ गया। उन्होंने एक दुकान का ताला तोड़ दिया, लेकिन बाद में सुरक्षा कर्मियों ने फिर ताला जड़ दिया।
शाम को कमेटी की बैठक हुई, लेकिन पीयू प्रशासन ने कह दिया कि स्टूडेंट सेंटर हेरिटेज है, यहां दोबारा दुकानें नहीं खोली जाएंगी। इसके बाद फिर छात्रों ने दुकानों के ताले रात को तोड़कर खोलने की कोशिश की, लेकिन अथॉरिटी ने उन्हें समझाया कि शनिवार को कुछ हल निकाला जाएगा, उसके बाद सभी छात्र नेता वहां से चले गए।
ये है ‘मम्मा मियां व ‘नेसकैफे’ की दुकान का मामला
स्टूडेंट सेंटर स्थित दो दुकानें वर्ष 2014-15 से संचालित हैं। आरोप है कि इन दुकानों के लिए न तो कोई टेंडर किया गया और न अन्य प्रक्रिया। सीधे ही एक छात्र नेता को यह आवंटित कर दी गईं। जून 2018 में पीयू प्रशासन ने दुकान संचालकों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि स्टूडेंट सेंटर हेरिटेज है, यहां कमर्शियल कार्य नहीं हो सकता है, ऐसे में दुकानें खाली करनी होंगी।
दुकानदारों को दो माह का समय दिया गया। बाद में फिर दो माह का कार्यकाल बढ़ा दिया गया। दो माह पूरे होने के बाद फिर पीयू प्रशासन ने आखिरी नोटिस दिया, लेकिन दुकानें खाली नहीं हुईं। वीरवार को नोटिस का समय पूरा हो गया तो शुक्रवार को रजिस्ट्रार प्रो. करमजीत सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर, चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर प्रो. अश्वनी कौल सुरक्षा कर्मियों के साथ स्टूडेंट सेंटर पहुंचे और उन्होंने काम कर रहे कर्मचारियों को बाहर आने को कहा। उसी दौरान हंगामा खड़ा हो गया।
छात्र नेताओं ने दुकान सील करने का जमकर विरोध किया। इस दौरान पुलिस और छात्र नेताओं में धक्कामुक्की व हाथापाई भी हो गई। पुलिस बल अधिक होने के कारण ‘मम्मा मियां’ व ‘नेसकैफे’ की दुकान सील कर दी गईं। जैसे ही वहां से अथॉरिटी के अधिकारी गए तो छात्र नेताओं ने एक दुकान के ताले तोड़ दिए। उसके बाद वह डीएसडब्ल्यू से मिलने पहुंचे। शाम इस इस पर बैठक हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। उसके बाद छात्र नेताओं ने सेंटर पहुंचकर ताला तोड़ने की कोशिश की लेकिन यह नहीं होने दिया।