कोटकपूरा गोलीकांड की सुनवाई के लिए जाते संबंधित
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चार साल पुराने कोटकपूरा गोलीकांड केस में शुक्रवार को जिला व सेशन जज हरपाल सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। इस मौके पर केस में नामजद पूर्व शिअद विधायक मनतार सिंह बराड़ समेत सभी पांचों पुलिस अधिकारी निलंबित आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, पूर्व एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा, एसपी बलजीत सिंह, एसपी परमजीत सिंह पन्नू और एसआई गुरदीप सिंह हाजिर रहे।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष द्वारा दायर विभिन्न याचिकाओं पर करीब डेढ़ घंटे तक दोनों पक्षों के वकीलों के बीच बहस हुई जिसके बाद जिला अदालत ने इन याचिकाओं पर फैसले के लिए 15 नवंबर की तारीख तय कर दी। जानकारी के अनुसार कोटकपूरा गोलीकांड केस में बचाव पक्ष ने हाल में ही दो याचिकाएं दायर की थी, जिसके माध्यम से उन्होंने इस घटना के संबंध में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर की स्टेट्स रिपोर्ट व रिकार्ड उपलब्ध करवाने और गोलीकांड मामलों की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख समेत पांचों सीनियर पुलिस अधिकारियों और उनके सहयोगी छह अधिकारियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल निकलवाने का आग्रह किया हुआ है।
इसके अलावा बचाव पक्ष ने निचली अदालत द्वारा खारिज अपनी उन याचिकाओं की रिवीजन पर दाखिल की हुई है जिसमें एसआईटी द्वारा मामले की जांच में नियमों की अनदेखी किए जाने और चालान से साथ अहम दस्तावेज न होने के आरोप लगाए गए थे। निचली अदालत ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था और इन सभी छह आरोपियों के खिलाफ पेश चालान को कमिट करके ट्रायल के लिए जिला व सेशन जज की अदालत में भेज दिया था।
सुनवाई के दौरान इन सभी याचिकाओं पर हुई बहस के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अदालत के समक्ष अपने अपने तर्क रखे। इन सभी याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करते हुए जिला अदालत ने मामले की सुनवाई 15 नवंबर तक स्थगित कर दी और उसी दिन इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया जाएगा। मालूम हो कि कोटकपूरा गोलीकांड मामले में एसआईटी द्वारा नामजद छह आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया जा चुका है और उन पर इस चालान के आधार पर आरोप तय करने की प्रक्रिया चल रही है।
फोन कॉल डिटेल मांगने का विरोध
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की याचिकाओं का सरकारी पक्ष ने जोरदार विरोध किया और कहा कि जांच टीम के सदस्यों का फोन रिकार्ड का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता क्योंकि इससे जांच टीम के गुप्त स्रोतों की शिनाख्त होगी जो कानूनी तौर पर नहीं बताए जा सकते। जिला अटार्नी रजनीश गोयल ने पंजाब सरकार और जांच टीम के हक में कहा कि मुलजिमों को जांच टीम की काल का रिकार्ड मांगने का कोई कानूनी हक भी नहीं है। दूसरे तरफ केस में घिरे पुलिस अधिकारियों के वकीलों ने दावा किया कि पूरे मामले की सच्चाई लाने के लिए जांच टीम के सदस्यों की मोबाइल काल का रिकार्ड सुरक्षित रखा जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि जांच टीम निष्पक्ष पड़ताल का दावा करती है तो वह रिकार्ड अदालत में पेश करने से पीछे क्यों हट रही है।