चंडीगढ़। गेहूं निर्यात पर रोक लगाने का केंद्र सरकार का फैसला हरियाणा के आढ़तियों और किसानों को नहीं भाया। उनका कहना है कि निर्यात बहाल किया जाए। इस बार मंडियों से बाहर से बाहर किसानों का गेहूं एमएसपी से अधिक दाम पर बिका है। काफी किसानों ने गेहूं बेचने की बजाय स्टॉक कर लिया है। व्यापारियों और आढ़तियों ने भी गेहूं को स्टॉक कर रखा है। इसलिए केंद्र के इस फैसले से नुकसान उठाना पड़ सकता है। 15 मई से मंडियों में सरकारी खरीद बंद हो रही है और निर्यात पर रोक से बाहर से गेहूं की मांग नहीं आ सकेगी। इससे किसानों को गेहूं की फसल का अधिक दाम नहीं मिल सकेगा।
खरीद का लक्ष्य आधा ही रह गया
इस बार हरियाणा में गेहूं खरीद का लक्ष्य आधा भी पूरा नहीं हो पाया। सरकार की ओर से 84 लाख मीट्रिक टन से अधिक का लक्ष्य रखा था। मंडियों में मात्र 44 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो पाई। इसका कारण ये रहा कि एक तो बेमौसमी बारिश के चलते गेहूं का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम रहा। इसके अलावा कुछ किसानों ने काफी मात्रा में गेहूं का स्टॉक भी कर रखा है।
केंद्र सरकार का यह फैसला किसानों के खिलाफ है। अगर निर्यात नहीं होगा तो गेहूं की मांग कैसे बढ़ेगी और किसानों को अपनी फसल का दाम अधिक कैसे मिलेगा। निर्यात खोला जाना चाहिए, तभी किसानों को लाभ मिलेगा।
- रजनीश चौधरी, प्रदेश संयोजक आढ़ती एसोसिएशन।
पहली बार गेहूं की अधिक मांग के चलते किसानों को एमएसपी से अधिक दाम मिला था। इसलिए किसानों ने अधिक रेट की आस में गेहूं घरों पर ही स्टॉक कर रखा है। निर्यात बंद करने से किसानों को नुकसान होगा और उनकी फसल को अधिक दाम नहीं मिल पाएंगे। भाकियू इसका विरोध करती है और इसके विरोध आंदोलन किया जाएगा।
-रतन मान, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू