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पंजाब की जेलों में कैदियों को भी मिलेगा काम

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पंजाब मंत्रिमंडल की ओर से बुधवार को तेलंगाना की तर्ज पर पंजाब जेल विकास बोर्ड की स्थापना करने का फैसला किया गया। इससे कैदियों पर रचनात्मक प्रभाव डालने के उद्देश्य से उन्हें लाभदायक आर्थिक गतिविधियों में शामिल किया जा सकेगा, जो जेलों में होने वाले जुर्म कम करने में भी सहायक हो सकता है।
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प्रवक्ता ने बताया कि यह कदम जेलों में होने वाले अपराधों को कम करने के उद्देश्य के साथ-साथ कैदियों को बोर्ड द्वारा चलाईं जा रही विभिन्न गतिविधियों में शामिल कर राजस्व पैदा करने में सहायता करेगा। बोर्ड की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे और जेल मंत्री इस बोर्ड के सीनियर वाइस चेयरपर्सन और जेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव /प्रमुख सचिव /सचिव इसके उप चेयरपर्सन होंगे। इसके अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव /प्रमुख सचिव (राजस्व), अतिरिक्त मुख्य सचिव /प्रमुख सचिव (वित्त), सचिव कानूनी एवं वैधानिक मामले, रजिस्ट्रार जनरल पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट और डायरेक्टर प्रोसीक्यूशन एंड लिटिगेशन इसके कार्यकारी सदस्य होंगे। इसके अलावा सरकार द्वारा दो गैर-सरकारी व्यक्ति नामजद किये जाएंगे, जिनमें से कम-से-कम एक महिला होगी, जिसने जेल प्रशासन या जेल सुधारों के क्षेत्र में अपनी
अलग पहचान बनाई हो। इसके अलावा सरकार द्वारा दो जेल अधिकारी, जो केंद्रीय जेलों के सुपरिंटेंडेंट या इसके समकक्ष या इससे ऊपर के पद पर रहे हों, इसके सदस्य के तौर पर नामज़द किये जाएंगे। जेलों के डायरेक्टर जनरल /जेलों के अतिरिक्त डायरेक्टर जनरल इस बोर्ड के सदस्य सचिव होंगे।
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करोड़ों में हो रही तेलंगाना सरकार को कमाई
उल्लेखनीय है कि पंजाब जेल विभाग ने तेलंगाना राज्य की तर्ज पर पंजाब विकास बोर्ड की स्थापना के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। विभाजन के बाद तेलंगाना राज्य ने आंध्र प्रदेश जेल विकास बोर्ड को अपना लिया, जिसकी स्थापना 2001 में की गई थी। तेलंगाना राज्य जेल विकास बोर्ड कई आर्थिक गतिविधियां करवा रहा है, जिन्होंने अपराधियों में वास्तव में व्यवहार में लाया। इन गतिविधियों के स्वरूप जेलों में होने वाले जुर्मों में कमी आई और कैदियों को बोर्ड की तरफ से करवाई इन अलग -अलग गतिविधियों में शामिल करके राजस्व भी पैदा किया जा रहा है। सिर्फ 2000 कैदियों और 3600 हवालाती की थोड़ी संख्या के बावजूद तेलंगाना जेल विकास बोर्ड ने साल 2017 में 399 करोड़ रुपये, 2018 में 536 करोड़ रुपये और 2019 में 600 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इस कारण तेलंगाना ने साल 2017 में 12.80 करोड़ रुपये, 2018 में 16.72 करोड़ और 2019 में 19.00 करोड़ रुपये का लाभ हासिल किया।
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