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Panchkula News: चार भव्य शोभायात्राओं की तैयारी, पहली वाराणसी से होगी शुरू

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चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने श्री गुरु रविदास जी महाराज के आने वाले 650वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में चार बड़ी शोभायात्राएं आयोजित करने का फैसला किया है। इनमें पहली शोभायात्रा पवित्र शहर वाराणसी से शुरू होगी। चारों यात्राओं का समापन तीन दिसंबर को श्री खुरालगढ़ साहिब में होगा।
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वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद और सांस्कृतिक मामले विभाग के एडवाइजर दीपक बाली की मौजूदगी में बताया कि इन धार्मिक शोभायात्राओं का मकसद श्री गुरु रविदास जी महाराज के सार्वभौमिक संदेश और पवित्र बाणी को लोगों तक पहुंचाना है। साथ ही अगले साल फरवरी में आने वाले 650वें प्रकाश पर्व से पहले श्रद्धालुओं को भक्ति और सद्भाव के साथ जोड़ना है।
उन्होंने बताया कि पहली शोभायात्रा 30 नवंबर को वाराणसी से शुरू होगी। यह कानपुर, दिल्ली, अंबाला, साहिबजादा अजीत सिंह नगर और रूपनगर से होते हुए तीन दिसंबर को श्री खुरालगढ़ साहिब पहुंचेगी।
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दूसरी शोभायात्रा दो दिसंबर को फरीदकोट से शुरू होगी। इसका रूट फिरोजपुर, मोगा, लुधियाना, शहीद भगत सिंह नगर और गढ़शंकर रहेगा। यह भी तीन दिसंबर को श्री खुरालगढ़ साहिब में संपन्न होगी।
तीसरी शोभायात्रा एक दिसंबर को बठिंडा से शुरू होगी। यह बरनाला, मानसा, लहरागागा, संगरूर, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, मोरिंडा और रूपनगर से होते हुए तीन दिसंबर को श्री खुरालगढ़ साहिब पहुंचेगी।
चौथी शोभायात्रा 30 नवंबर को जम्मू के पड़ोसी इलाके से शुरू होगी। यह पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर और होशियारपुर से होते हुए तीन दिसंबर को श्री खुरालगढ़ साहिब पहुंचेगी।
चीमा ने कहा कि चारों शोभायात्राओं के श्री खुरालगढ़ साहिब में एक साथ पहुंचने के बाद चार दिसंबर को श्री अखंड पाठ साहिब के आरंभ के साथ मुख्य आध्यात्मिक समागम शुरू होगा। धार्मिक अनुष्ठानों का समापन छह दिसंबर को श्री अखंड पाठ साहिब के भोग समारोह के साथ होगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पिछले साल शुरू किए गए रोडमैप के तहत गुरु रविदास जी महाराज की शिक्षाओं और दर्शन से जुड़े कार्यक्रम शहरों और ग्रामीण इलाकों में आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें ड्रोन शो, कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में अकादमिक सेमिनार, स्कूलों में निबंध प्रतियोगिताएं, पवित्र पदों पर बौद्धिक चर्चा और कीर्तन दरबार शामिल हैं।
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