पीस टेस्ट की तैयारियों के लिए रिव्यू मीटिंग
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वर्ष 2021 में होने वाले प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट (पीसा) को लेकर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को यूटी गेस्ट हाउस में पीसा को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने एक रिव्यू बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि वह पिछली बार से 20 पायदान ऊपर आए। साल 2009 में भारत की रैंकिंग 74 रही थी, जबकि कुल 76 देशों ने ही इस टेस्ट में हिस्सा लिया था।
केंद्रीय राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने शहर के विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपलों के साथ बैठक की। इसके अलावा वह कुछ स्कूली बच्चों से मिले और जीएमएसएसएस-धनास और सेक्टर-8 स्थित डीएवी स्कूल का भी दौरा किया। कहा कि उन्हें धनास का सरकारी स्कूल काफी पसंद आया। स्कूल का हर्बल गार्डन, किचन गार्डन, साइंस पार्क आदि काफी पसंद आए। अन्य राज्यों को भी ऐसे प्रयोग करने चाहिए। संजय धोत्रे ने कहा कि पीसा टेस्ट का उद्देश्य सिर्फ रैंकिंग में ऊपर आना नहीं है, बल्कि इससे विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा।
शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। इसके अलावा अध्यापकों को भी कई तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है। कहा कि बच्चों के अंदर बैठे परीक्षा के डर को निकालना होगा। बच्चों का विश्वास बढ़ेगा तभी सफर आसान होगा। पीसा टेस्ट के लिए पूरे देश में चंडीगढ़ को ही क्यों चुना गया, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि बहुत से पैरामीटर्स को देखने के बाद चंडीगढ़ को चुना गया है। यहां जो भी सकारात्मक बदलाव आएंगे, वह पूरे देश में बहुत तेजी से फैलेगा।
अप्रैल में होगा ट्रायल, मई 2021 में परीक्षा
केंद्रीय राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने बताया कि अप्रैल महीने में प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट (पीसा) का ट्रायल किया जाएगा। इसे लेकर एमएचआरडी की तरफ से कई दिशा-निर्देश पिछले साल ही जारी कर दिए गए थे। अप्रैल में होने वालेे ट्रायल के लिए शिक्षा विभाग ने शहर के सभी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों और टीचर्स का ब्यौरा एमएचआरडी को भेजा है। साल 2021 में आयोजित होने वाली मुख्य परीक्षा में चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल, प्राइवेट स्कूल, केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय के छात्र चयन के आधार पर भाग लेंगे।
जेएनयू में हिंसा के सवाल पर बोले- चर्चा होनी चाहिए लेकिन हिंसा की जगह नहीं
शिक्षण संस्थानों और खासकर जेएनयू में हुई हिंसा के सवाल पर केंद्रीय राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने कहा कि जेएनयू एक बहुत ही प्रतिष्ठित संस्थान है। वहां विद्यार्थी पढ़ने जाते हैं। कैंपस मेें चर्चा होनी चाहिए, लेकिन हिंसा से नुकसान हो रहा है। किसी भी संस्थान को बनाने में कई साल लग जाते हैं, जबकि बिगाड़ने में पल भर का समय ही काफी होता है। यह किसी के लिए अच्छा नहीं है। पुलिस के घुसने के सवाल पर उन्होंने कहा कि घटना के बाद अगर पुलिस गई तो सवाल उठते हैं और अगर नहीं गई तो भी पूछा जाता है कि क्यों नहीं गई।
2009 में 74 देशों में से 72वें नंबर पर आया था भारत
भारत ने आखिरी बार साल 2009 में पीसा में हिस्सा लिया था। उस प्रतियोगिता में कुल 74 देशों ने हिस्सा लिया था और भारत का स्थान 72वां रहा था। इसमें हिमाचल और तमिलनाडु के छात्रों ने हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में भारत का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा, जिसके चलते तत्कालीन भारत सरकार ने खुद को पीसा से अलग कर लिया था, लेकिन साल 2016 में एमएचआरडी ने पीसा में फिर हिस्सा लेने का फैसला किया। हालांकि, 2018 पीसा में किसी कारणवश भारत हिस्सा नहीं ले पाया। आखिरकार अब चंडीगढ़ को 2021 पीसा के लिए चुना गया क्योंकि सीखने के मामले में चंडीगढ़ का रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है।
क्या है ‘पीसा’
पीसा टेस्ट से विश्व भर के विभिन्न देशों की शिक्षा प्रणालियों के बारे में जानकारी मिलती है। इस टेस्ट में छात्रों द्वारा स्कोर किए गए अंकों से राष्ट्रीय औसत स्कोर निकाला जाता है। इस टेस्ट का उद्देश्य देशों की रैंकिंग निश्चित करना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना है कि किस प्रकार देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार किया जा सकता है।
इस टेस्ट में देश के विभिन्न हिस्सों से 15 साल 3 महीने से 16 साल 2 महीने के बीच के बच्चों को भाग लेने के लिए भेजा जाता है। यह टेस्ट ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकॉनोमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) द्वारा हर तीन साल बाद कराया जाता है, जिसमें लगभग 80 देश भाग लेते हैं।