चंडीगढ़। पंजाब में बिजली संकट बरकरार है। मांग के अनुरूप आपूर्ति कम होने के कारण पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) ने बड़े उद्योगों के संचालन पर प्रतिबंध और बढ़ा दिया है। सूबे के मध्य, उत्तर और पश्चिम क्षेत्रों के बड़े उद्योगों के संचालन पर 10 जुलाई तक रोक लगा दी है। साथ ही बिजली की सतत आपूर्ति को भी 18 जुलाई तक स्वीकृत भार का केवल 50 प्रतिशत उपयोग करने को कहा है।
भीषण गर्मी के बीच पंजाब इन दिनों बिजली संकट से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह लगातार बिजली संकट से राज्य को उबारने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा कर रहे हैं। इसके बावजूद अभी राज्य में हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। इस कारण पावरकॉम ने 100 किलोवॉट वाले उद्योगों को होने वाली बिजली आपूर्ति के प्रतिबंधों को और बढ़ाने का फैसला किया है।
हर रोज 40 हजार का नुकसान
उद्योगों को बिजली आपूर्ति नहीं मिलने से काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार राज्य में 50 श्रमिकों वाली एक इकाई को प्रतिदिन 35,000 रुपये के नुकसान है। पंजाब में दो लाख से अधिक लघु उद्योग संचालित होते हैं, जबकि 415 बड़े और मध्यम स्तर के उद्योग स्थापित हैं।
बिजली कटौती ही विकल्प
पंजाब में बिजली की बढ़ती मांग के अनुरूप पीएसपीसीएल के पास बिजली कटौती ही विकल्प रह गया है। धान की रोपाई के बीच बिजली की औसत मांग बढ़कर 14500 मेगावॉट हो गई है, जबकि आपूर्ति 13200 मेगावॉट हो रही है। हर दिन बिजली आपूर्ति के 1300-1500 मेगावॉट के अंतर के बीच बिजली कटौती करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।