देश में दुष्कर्म की घटनाओं के भले ही अलग-अलग कारण रहे हों, लेकिन अधिकतर लड़कियों ने इसके लिए अश्लील (पोर्न) साइट्स को बड़ा जिम्मेदार माना है।
सेल्फी विद डाटर फाउंडेशन के वार अगेंस्ट रेप अभियान के तहत आयोजित वेबिनार में लड़कियों ने किसी सार्वजनिक प्लेटफार्म पर पहली बार दुष्कर्म के कारण, पीड़िता को मिलने वाले न्याय और सरकार के साथ न्यायपालिका की भूमिका पर खुलकर चर्चा की। दिल्ली के निर्भया रेप केस की एडवोकेट सीमा समृद्धि और अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंटरी मेकर विभा बख्शी समेत कई बुद्धीजीवियों ने देश में बनाए गए सख्त कानूनों का हवाला देते हुए दुष्कर्मी के खिलाफ न्याय मिलने तक जंग जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
दुष्कर्म की शिकार दो लड़कियां इस वेबिनार में शामिल हुईं। हरियाणा के इतिहास में पहली बार किसी प्लेटफार्म पर आकर इन लड़कियों ने ह्रदय विदारक आपबीती सुनाई। सेल्फी विद डाटर फाउंडेशन एंड कंपेन ने वार अगेंस्ट रेप अभियान की शुरुआत करने का साहस जुटाया है। फाउंडेशन के संयोजक सुनील जागलान ने बताया कि वेबिनार में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र समेत विभिन्न राज्यों के दुष्कर्म के आंकड़े पेश करते हुए इसके कारणों पर खुलकर चर्चा की गई।
वेबिनार में अधिकतर वक्ताओं ने कहा कि पोर्न साइट दुष्कर्म की बढ़ती प्रवृत्ति की जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार ने एक बार इस पर प्रतिबंध भी लगाया था, लेकिन वह प्रभावित पक्ष के विरोध के आगे टिक नहीं पाया, जिसे सख्ती से लागू किए जाने की जरूरत है। सेल्फी विद डाटर फाउंडेशन एंड कंपेन से जुड़ी अंजुम इस्लाम, शहनाज, रिजवाना, वसीमा, आरस्तुन, अनवी अग्रवाल, पूजा और प्रिया पांडेय ने इस बहस में हिस्सा लिया।
एडवोकेट सीमा समृद्धि ने विभिन्न मामलों में आई धमकियों का जिक्र करते हुए कहा कि अब सरकारों ने कानून सख्त बना दिए हैं। यदि मजबूत पैरवी की जाए तो न्याय मिलना आसान है। अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंटरी मेकर विभा बख्शी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को पोर्न साइट्स पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने की दिशा में कड़ा फैसला लेना होगा।
ये बड़े कारण बन रहे दुष्कर्म की वजह
फाउंडेशन के संयोजक सुनील जागलान के मुताबिक करीब ढाई घंटे तक चले वेबिनार में पोर्न साइट्स, नशे के फैलते जाल, पुरुषों की दुर्बल मानसिकता, महिलाओं का कमजोर आत्मविश्वास, किसी भी शहर या गांव में मवालियों का एकांत अड्डा, मजबूत कानून के बावजूद कमजोर पैरवी व सामाजिक मान मर्यादा का डर न केवल अपराध का बड़ा कारण है, बल्कि न्याय में बड़ी बाधा है।