चंडीगढ़। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बाेर्ड (बीबीएमबी) के नियमों में बदलाव संबंधित अधिसूचना पर सियासत तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने इसे पंजाब के खिलाफ बड़ी साजिश बताते हुए अधिसूचना को तुरंत वापस लेने की मांग की है जबकि कांग्रेस का कहना है कि पंजाब में राष्ट्रपति शासन की तैयारी चल है।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा, पार्टी बीबीएमबी में पंजाब के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए नियमों को खत्म करने की साजिश की कड़ी निंदा करता है। जिस तरह से केंद्र सरकार नियमों में बदलाव करने, भाखड़ा बोर्ड में पंजाब के अधिकारों को खत्म करने और बीबीएमबी में अन्य राज्यों के अधिकारियों को नियुक्त करने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर रही है उससे पंजाब के सिंचाई और बिजली के अधिकारों के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी खतरा पैदा हो गया है। सुखबीर ने कहा कि इस पंजाब विरोधी नोटिफिकेशन को तुरंत वापस लिया जाए क्योंकि यह राज्य के संघीय अधिकारों पर सीधा हमला है।
उधर, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह वड़िंग कहते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री पंजाब में प्रॉक्सी के जरिये शासन करने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के बचे हुए अधिकारों को कमजोर करने की एक और कोशिश है। यह देश की संघीय संरचना पर सीधा हमला है क्योंकि केंद्र धीरे-धीरे राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल दे रहा है। पंजाब सरकार को मजबूत कानूनी कदम उठाने चाहिए और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। अन्यथा इसके गंभीर परिणाम होंगे और जल्द ही केंद्र सरकार सतलुज यमुना लिंक कैनाल (एसवाईएल) के जरिये पंजाब का पानी हरियाणा को देने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।