चंडीगढ़। पुलिस कर्मचारी की आत्महत्या के बढ़ते मामलों को लेकर दाखिल जनहित याचिका में हाई पावर कमेटी गठित करने की मांग की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और यूटी प्रशासन को आधिकारिक ड्यूटी के दौरान पुलिस मुलाजिमों में तनाव को लेकर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान फगवाड़ा निवासी याचिकाकर्ता सुरेंद्र मित्तल के वकील ने बताया कि बढ़ते तनाव के कारण पुलिसकर्मियों व अधिकारियों के आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि 50 वर्ष से अधिक आयु के पुलिसकर्मी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुन रहे हैं। उदाहरण के तौर पर हाईकोर्ट के समक्ष एएसआई सतीश कुमार की आत्महत्या का मामला रखा गया, जो होशियारपुर के हरियाना पुलिस स्टेशन में तैनात थे।
याचिकाकर्ता के अनुसार संबंधित पुलिस स्टेशन के एसएचओ ने मृतक पुलिसकर्मी को सभी के सामने बेइज्जत किया था और उसकी मां और बहन के बारे में अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। वास्तविक कारण जानने के लिए राज्य पुलिस के पास लंबित ऐसे सभी आत्महत्या मामलों की स्वतंत्र रूप से जांच कराई जानी चाहिए।
याची ने अपील की कि मनोचिकित्सा क्षेत्र में काम करने वाले वरिष्ठ डॉक्टर और उच्च अधिकारियों की एक समिति गठित करने का निर्देश दिया जाए जो पुलिस बलों की कामकाजी परिस्थितियों में सुधार कर सके। इससे उनके कर्तव्य पालन का मार्ग आसान होगा और वे तनाव और अवसाद के कारण आत्महत्या जैसा मार्ग नहीं अपनाएंगे। साथ ही याचिकाकर्ता ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश देने की मांग की है कि वे पुलिस विभाग के बुनियादी ढांचे को पुनर्जीवित करने के लिए एक विशेष उच्चस्तरीय समिति का गठन करें। यह जांच की जाए कि क्या कहीं वरिष्ठ और कनिष्ठ अत्यधिक तनाव में काम तो नहीं कर रहे हैं, साथ ही सुधारों के सुझाव भी प्राप्त किए जाएं।