कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
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उन्होंने कहा कि इस समय पर जब पंजाब समेत देश भर में सभी पार्टियां अपने पार्टी हितों से ऊपर उठकर इस संकट से लड़ने के लिए हाथ मिला रही हैं, वहीं हरसिमरत अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए यह सब कुछ कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने इस संकट के समय हरसिमरत पर राज्य सरकार को सहयोग देने की बजाय सरकार की कोशिशों को कमजोर करने के लिए आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘‘आप वहां बैठे क्या कर रहे हो, अगर आप पंजाब और पंजाब के लोगों के लिए नहीं लड़ सकते?’’ हरसिमरत बादल के झूठ के राज खोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो उनकी तरफ से 2366 करोड़ रुपये का जिक्र किया गया है वह जीएसटी के हिस्से के तौर पर राज्य का बकाया पैसा था।
यहां तक कि अभी भी राज्य का 4400 करोड़ रुपये केंद्र सरकार के पास बकाया पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘आप कोविड की जंग के लिए अपेक्षित राहत पैकेज लेना तो दूर बल्कि हमें हमारे बकाए भी नहीं दिला सके।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि हरसिमरत बादल द्वारा अपने ट्वीट में जो बाकी राशि का जिक्र किया गया है वह भी राज्य के आम बकाये हैं, जिनका कोविड -19 की जंग से कोई लेना-देना नहीं है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरसिमरत द्वारा 10,000 टन दालें देने के दावों के उलट राज्य को अब तक सिर्फ 42 टन दाल प्राप्त हुई हैं, जिसे राज्य की जरूरत के मुताबिक मजाक ही कहा जा सकता है। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि हरसिमरत ने खुद सुझाव दिया था कि केंद्र सरकार को सभी राज्यों में गरीबों के लिए छह महीनों के राशन का बंदोबस्त करना चाहिए।
कैप्टन ने कहा कि ‘‘केंद्र अनाज को सड़ते रहने को प्राथमिकता देता है और मुल्क के गरीबों और जरूरतमंद लोगों का पेट भरने के लिए अनाज बरतने की बजाय अनाज सड़ने से होने वाले घाटे की भरपाई का बोझ भी राज्य सरकार के ऊपर डाल दिया जाता है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड -19 के लिए राहत पैकेज तो एक तरफ रहा, केंद्र सरकार ने तो मुलाजिमों के लिए बीमा और किसानों के लिए बकाए बोनस का निपटारा तक नहीं किया।