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आज पीजीआई की ओपीडी में न जाएं, छह हजार मरीजों को नहीं मिलेगा इलाज

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नेशनल मेडिकल कमिशन बिल (एनएमसी) के खिलाफ पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों ने कड़ा रुख अपना लिया है। डॉक्टरों के समूह ने शनिवार को ओपीडी में काम नहीं करने का फैसला लिया है।
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रेजिडेंट डॉक्टरों के इस निर्णय के बाद पीजीआई प्रशासन हरकत में आ गया है। मरीजों की परेशानी देखते हुए पीजीआई ने अगले आदेश तक ओपीडी को बंद रखने का फैसला लिया है। सभी प्लान सर्जरी को टाल दिया गया है। फेकल्टी मेंबर को अलर्ट पर रखा गया है। उन्हें इमरजेंसी केयर पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, रेजिडेंट डॉक्टर इमरजेंसी व आईसीयू में अपनी सेवाएं चालू रखेंगे।
पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. उत्तम ठाकुर का कहना है कि यदि एनएमसी बिल के बारे में जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे इमरजेंसी व आईसीयू सेवाओं से हाथ खींच लेंगे। उनका कहना है कि यदि यह बिल आया तो गांव व पिछले इलाकों में रहने वाले लोगों को क्वालिटी हेल्थ केयर नहीं मिल पाएगा। बिल के तहत छह महीने का एक ब्रिज कोर्स लाया जाएगा, जिसके तहत प्राइमरी हेल्थ में काम करने वाले भी मरीजों का इलाज कर पाएंगे। इसका कोई भी क्राइटेरिया फिक्स नहीं किया गया है।
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हड़ताल करने वाले डॉक्टर नेक्स्ट का भी विरोध जता रहे हैं। इसके तहत ग्रेजुएशन के बाद डॉक्टरों को एक परीक्षा देनी होगी और उसके बाद ही मेडिकल प्रैक्टिस का लाइसेंस मिल सकेगा। इसी परीक्षा के आधार पर पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए दाखिला होगा। अगले तीन वर्षों में एग्जिट परीक्षा लागू कर दी जाएगी।
छह हजार मरीज और 100 सर्जरी होंगी प्रभावित
ओपीडी बंद होने से कम से कम छह हजार मरीज इलाज से महरूम रहेंगे। कम से कम 100 प्लान सर्जरी भी रद्द होंगी। शनिवार होने के कारण इस दिन छह हजार मरीजों की ओपीडी होती है। यदि ओपीडी वर्किंग डे पर बंद होती तो दस हजार मरीज प्रभावित होता। पीजीआई के सूत्रों ने बताया कि एक दिन में पीजीआई कम से कम 100-110 प्लान सर्जरी करता है। सर्जरी में रेजिडेंट अहम भूमिका निभाते हैं। पूरे पीजीआई में करीब 1200 रेजिडेंट डॉक्टर हैं। हालांकि, पीजीआई का दावा है कि जो इमरजेंसी सर्जरी होंगी, उन्हें हर हालत में किया जाएगा। किसी भी इमरजेंसी में आने वाले मरीज को पूरा इलाज मिलेगा।
आज इन मरीजों को ओपीडी में नहीं मिलेगा इलाज
बच्चों में पेट में होने वाली बीमारी, कैंसर, इम्यूनोडेफिसिएंसी, किडनी, फैमिली प्लानिंग, इनफर्टिलिटी, प्रीनेटल क्लीनिक, क्रोनिया, ग्लूकोमा, लैंस क्लीनिक, रेटिना, ओरल सर्जरी, स्पोर्ट्स इंजरी, ट्रामा क्लीनिक, ऑडियोलाजी स्पीच, ट्यूमर क्लीनिक, पीडियाट्रिक गट क्लीनिक , पीडियाट्रिक लिवर क्लीनिक व पीडियाट्रिक आंकोलाजी क्लीनिक के मरीजों को इलाज नहीं मिल पाएगा। ये सभी स्पेशल क्लीनिक हैं। इनके मरीज गंभीर होते हैं और इन सभी मरीजों की ओपीडी शनिवार को होती है। इन क्लीनिक में आने वाले अधिकतर मरीज दूर-दराज इलाकों से आते हैं। ऐसे में उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ सकता है।
ओपीडी कब खुलेगी, कुछ पता नहीं
रेजिडेंट डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन विरोध का एलान किया है। पीजीआई ने भी अगले आदेश तक ओपीडी बंद रखने का फैसला लिया है। यदि रविवार तक कोई फैसला नहीं होता है तो सोमवार को भी ओपीडी बंद रहेंगी। यदि ऐसा हुआ तो मरीजों को बहुत ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है। सोमवार को ओपीडी 10 हजार से पार कर जाती है।
कोट
हमारी बिल पर कुछ आपत्तियां हैं। उस पर विचार किया जाए। यदि वे नहीं मानें तो इमरजेंसी व आईसीयू में भी ड्यूटी नहीं देंगे। ये लड़ाई मरीजों के लिए ही है। यह बिल आया तो गांव व पिछड़े इलाके में रहने वाले लोगों को क्वालिटी केयर नहीं मिल पाएगा।
-डॉ. उत्तम ठाकुर, प्रेसिडेंट एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर पीजीआई
कोट
इमरजेंसी सेवाएं चलती रहेंगी। वार्ड, इमरजेंसी में करीब ढाई हजार मरीज एडमिट रहते हैं। उनके लिए फेकल्टी तैनात रहेगी। इस बारे में फेकल्टी एसोसिएशन के साथ मीटिंग भी हो चुकी है। हमने रेजिडेंट डॉक्टरों से कहा कि यदि वे कोई डिमांड पत्र देना चाहते हैं तो वे दे दें, उसे मंत्रालय तक पहुंचा दिया जाएगा। उनसे विरोध प्रदर्शन वापस लेने की भी मांग की है।
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-प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई चंडीगढ़
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