पीजीआई के डॉक्टर दंपति की अग्रिम जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दी। डॉक्टर दंपति ने अर्जी लगाई थी, लेकिन पुलिस ने उस अर्जी का विरोध किया और मामले की उचित तफ्तीश के लिए दंपति से पूछताछ करना अनिवार्य बताया।
लिहाजा, कोर्ट ने पुलिस की विरोध याचिका को मंजूर कर लिया। दंपति के खिलाफ सेक्टर-5 थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। आरोप है कि सेक्टर-11 की एक कोठी को फर्जी तरीके से अपना बताया। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।
सेक्टर-11 निवासी सरिता कौशल की शिकायत पर डॉ. गुरविंदर धामी एवं डॉ. मीनाक्षी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
डॉ. धामी दंपति ने सरिता कौशल के पति डॉ. अनिल कौशल का सेक्टर-11 स्थित मकान खरीदने के लिए सौदा किया था। सौदे के तहत डॉ. धामी दंपति ने पांच लाख रुपये बतौर बयाना डॉ. कौशल को दिए थे।
जिस दिन मकान की रजिस्ट्री होनी थी, उस दिन डॉ. धामी दंपति तहसील में नहीं पहुंचे और उसके बाद डॉ. कौशल से भी संपर्क नहीं किया।
आरोप है कि उन्होंने एक एफिडेविट तैयार किया था, जिसमें डॉ. कौशल के घर को अपने नाम पर कर लिया गया था। इस एफिडेविट में धामी दंपति ने डॉ. कौशल के मकान को 19 लाख दस हजार रुपये में खरीदने की बात लिखी हुई थी।
एफिडेविट को टैंपर करते हुए डॉ. धामी दंपति ने तहसीलदार, डॉ. अनिल कौशल व उनकी पत्नी सरिता कौशल के जाली हस्ताक्षर करके मकान को खरीदने की बात लिखी हुई थी।
एफिडेविट के आधार पर डॉ. धामी ने बैंक लोन के लिए आवेदन कर दिया और बैंक ने भी बिना जांच पड़ताल के लोन जारी कर दिया। लोन मिलने के बाद धामी दंपति ने सेक्टर-4 में कोठी खरीद ली।
जबकि, लोन डॉ. कौशल के घर के नाम पर लिया था। कौशल को अपने साथ हुए धोखे का उस वक्त पता चला, जब उनके घर बीमा कंपनी से पत्र आया, जिसमें उनके घर का बीमा होने की बात दर्ज थी। जबकि, उन्होंने कोई बीमा नहीं कराया था। चौंकाने वाली बात यह थी कि बीमा पॉलिसी में मालिक डॉ. धामी दंपति थे। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और उसके बाद ईओडब्ल्यू में जांच हुई और मामला सेक्टर-5 थाने में दर्ज कर लिया गया।