तरनतारन निवासी कश्मीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि वह 1964 में भारतीय सेना में सिपाही भर्ती हुआ था। 1974 में वह सेवानिवृत्त हो गया था जिसके बाद से वह पेंशन प्राप्त कर रहा था। 2019 में केंद्र सरकार को पता चला कि याची की पेंशन तय करने में गलती हुई है।
आर्मी से 1974 में रिटायर हुए सिपाही को दी गई अतिरिक्त पेंशन की रिकवरी के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अवैध व गैर कानूनी करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। 80 वर्षीय याचिकाकर्ता को इस मामले में कोर्ट की शरण लेनी पड़ी जिसे प्रताड़ना मानते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने यह राशि पीड़ित को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया है।
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तरनतारन निवासी कश्मीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि वह 1964 में भारतीय सेना में सिपाही भर्ती हुआ था। 1974 में वह सेवानिवृत्त हो गया था जिसके बाद से वह पेंशन प्राप्त कर रहा था। 2019 में केंद्र सरकार को पता चला कि याची की पेंशन तय करने में गलती हुई है जिसके चलते उसे अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा था। केंद्र सरकार ने इसके बाद याची की पेंशन दोबारा तय की और अतिरिक्त भुगतान की गई राशि को रिकवर करने का फैसला लिया। इसके लिए उसकी पेंशन से 3500 रुपये प्रतिमाह की दर से कटौती की जाने लगी।
याचिकाकर्ता ने उसकी पेंशन दोबारा तय करने तथा अतिरिक्त राशि की रिकवरी के आदेश को चुनौती दी थी। केंद्र सरकार ने कहा कि उनके सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से पेंशन राशि गलत तय कर दी गई थी जिसमें अब सुधार लिया गया है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पेंशन की राशि दोबारा तय करने के आदेश को सही करार दिया हालांकि याची को भुगतान की गई अतिरिक्त राशि की रिकवरी के फैसले को अवैध तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन माना।
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कोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए अतिरिक्त राशि रिकवर करने के आदेश को खारिज कर दिया। रिकवरी के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता को कोर्ट आना पड़ा जिसे प्रताड़ना मानते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार पर 25000 रुपये जुर्माना लगाते हुए यह राशि याची को देने का आदेश दिया है।