सबूतों के अभाव में विशेष सीबीआई कोर्ट ने आरोपों से बरी किया
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। दंत शल्य चिकित्सक (डेंटल सर्जन) भर्ती परीक्षा में अंकों में हेराफेरी से जुड़े चर्चित मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोप तय करने योग्य पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर आरोपी पवन गुप्ता को माममें आरोपों से बरी कर दिया। इससे पहले पवन गुप्ता इस केस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत पर चल रहे थे।
यह मामला पंचकूला के विजिलेंस ब्यूरो थाना में दर्ज किया गया था। जांच के दौरान अनिल नागर, नवीन, अश्वनी और पवन गुप्ता को आरोपी बनाया गया। सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। सभी दलीलें सुनने के बाद विशेष सीबीआई अदालत ने माना कि पवन गुप्ता के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उन्हें मामले से डिस्चार्ज किया जाता है।
मामले की शुरुआत नरिंदर नामक व्यक्ति की शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पंचकूला सेक्टर-11 स्थित सफेदोट ई-सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) ने ऑनलाइन आवेदन पोर्टल का कार्य सौंपा था। आरोप था कि कंपनी के मालिक अपने सहयोगियों के साथ मिलकर नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी कर रहा था।
शिकायत के अनुसार गिरोह उम्मीदवारों को परीक्षा में केवल 30 से 40 प्रश्न हल करने और शेष उत्तर शीट खाली छोड़ने की सलाह देता था। बाद में आरोपियों द्वारा खाली छोड़े गए उत्तर खुद भर दिए जाते थे। इसके बदले उम्मीदवारों से भारी रकम वसूली जाती थी। जांच एजेंसी का दावा था कि इस तरीके से करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ।