पंचकूला। ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में सरकारी अस्पतालों की नर्सों की तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल सोमवार से शुरू हो गई। पंचकूला के सिविल अस्पताल और मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में 100 से ज्यादा नर्सिंग स्टाफ के दो घंटे पेन-डाउन पर रहने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। ओपीडी में डॉक्टर मरीज देखते रहे, लेकिन इंजेक्शन, ड्रेसिंग, बीपी-शुगर जांच और दवा वितरण जैसी नर्सिंग सेवाएं प्रभावित रहीं।
तीन दिन के अवकाश के बाद सोमवार को अस्पताल पहुंचे मरीजों की भीड़ से ओपीडी में लंबी कतारें लग गईं। जनरल वार्ड में भर्ती मरीजों को ड्रिप बदलवाने और रूटीन इंजेक्शन लगवाने के लिए इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों के परिजनों को नर्सिंग सेवाएं शुरू होने का इंतजार करना पड़ा। एनआरएचएम के कर्मचारियों ने मरीजों की मदद की।
एसोसिएशन ने इमरजेंसी, लेबर रूम, बच्चों के वार्ड और इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर को हड़ताल से बाहर रखा, जिससे गंभीर मरीजों की सेवाएं जारी रहीं।
बिना अटेंडेंट अकेले नाइट ड्यूटी मुश्किल
एमसीएच के बाहर एसोसिएशन की स्टेट प्रेसिडेंट विनीता कुमारी ने कहा कि नर्सिंग कैडर में 95 प्रतिशत महिलाएं हैं और उन्हें 24 घंटे तीन शिफ्ट में काम करना पड़ता है। पांच साल पूरा होते ही बिना पर्याप्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के दूर-दराज ट्रांसफर किया जा रहा है। पीएचसी-सीएचसी में महिला स्टाफ को बिना महिला अटेंडेंट अकेले नाइट ड्यूटी करनी पड़ती है। मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज होगा।
सीएमओ डॉ. मुक्ता कुमार ने एमसीएच और सिविल अस्पताल की ओपीडी का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक प्रबंध किए गए हैं और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होने दी जाएंगी।