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Panchkula News: असली जमीन पर कागजी पाैधे, 7413 एकड़ में लहलहाई भ्रष्टाचार की फसल

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किसानों के नाम पर योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप, दो अधिकारियों समेत अन्य कर्मचारियों पर एफआईआर
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। असली जमीन पर पौधे नहीं थे, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में हजारों एकड़ में बाग लहलहाते दिखाए गए। किसानों के नाम पर चलाई गई बागवानी योजनाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में करीब 13 साल बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) पंचकूला ने एफआईआर दर्ज की है।
जांच में वर्ष 2007-08 से 2012-13 के दौरान करीब 7413 एकड़ क्षेत्र में नए बाग लगाने और पुराने बागों के कायाकल्प से जुड़ी योजनाओं में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। एसीबी जांच के अनुसार 2,000 हेक्टेयर (करीब 4,942 एकड़) में नए फलों के बाग लगाने और 1,000 हेक्टेयर (करीब 2,471 एकड़) में पुराने बागों के रीजुवेनेशन (कायाकल्प) कार्य के लिए सहायता दी गई थी।
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यमुनानगर जिले में 110 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित था, लेकिन कई स्थानों पर रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर मिला। कहीं बागों का पूरा भुगतान दर्शाया गया, जबकि खेतों में पौधे नहीं मिले। कुछ जगहों पर गिने-चुने पौधे पाए गए, लेकिन रिकॉर्ड में पूरे क्षेत्र का लाभ दिखाया गया।जांच में सब्जियों, फूलों, टमाटर और शिमला मिर्च के बीजों की खरीद एवं वितरण में भी अनियमितताएं सामने आईं। करीब 6.30 लाख रुपये के सब्जियों के बीज किसानों तक पहुंचे ही नहीं और कार्यालय में पड़े-पड़े एक्सपायर हो गए।
फूलों के बीज ऑफ-सीजन में वितरित किए जाने की बात भी सामने आई।मामले की जांच के आदेश 18 मार्च 2013 को दिए गए थे। विजिलेंस जांच के बाद 18 जुलाई 2025 को रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेजी गई। इसके आधार पर 3 जुलाई 2026 को एफआईआर की मंजूरी मिली और 5 अगस्त 2026 को एसीबी पंचकूला ने मामला दर्ज कर लिया।
जांच में कुल 26 आरोपों की पड़ताल की गई, जिनमें से यमुनानगर जिले से जुड़े 5 आरोप सही पाए गए। साथ ही वर्ष 2007-08 से 2012-13 के दौरान घटिया बीज के 82 मामलों में नियमानुसार कार्रवाई न करना भी गंभीर लापरवाही माना गया है। एसीबी ने तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, गबन, धोखाधड़ी और जालसाजी समेत विभिन्न धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी है।

बीज अधिनियम के उल्लंघन का भी आरोप
एफआईआर में बीज अधिनियम-1966 के उल्लंघन का भी जिक्र है। जांच में सामने आया कि वर्ष 2007-08 से 2012-13 के दौरान कई जिलों में घटिया गुणवत्ता के बीजों के मामले सामने आने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने नियमानुसार न्यायालय में मुकदमे दर्ज नहीं कराए। रिपोर्ट में इसे पद के दुरुपयोग और सरकारी हितों की अनदेखी माना है। एसीबी ने तत्कालीन डीएचओ सुधीर यादव, एचओडी सोरन सिंह व अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
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2007 से 2013 तक गड़बड़ी के आरोप
जांच में वर्ष 2007-08 से 2012-13 के दौरान बागवानी योजनाओं में कई अनियमितताएं सामने आईं। नए बाग लगाने और पुराने बागों के कायाकल्प कार्यों में रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया गया। कई स्थानों पर कागजों में बाग दर्शाए गए लेकिन मौके पर पौधे नहीं मिले। बीज खरीद और वितरण में भी गड़बड़ी मिली। करीब 6.30 लाख के सब्जियों के बीज किसानों तक नहीं पहुंचे और कार्यालय में पड़े-पड़े खराब हो गए। जांच में इन मामलों को गंभीर लापरवाही माना गया।
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