उच्चतर शिक्षा में गुणवत्ता और शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन हमारी सर्वोपरि प्राथमिकता है। सभी उच्चतर शिक्षा संस्थानों को उचित समय पर मूल्यांकन कराना चाहिए। यह कहना है बीएस पूर्ण मोदिराज का। उन्होंने यह बात सेक्टर-1 स्थित पीजी कालेज में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी (नेशनल सेमिनार ) में कही।
सेमिनार में हरियाणा के 110 राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य, नैक संयोजक व रूसा इंचार्ज ने भाग लिया। सेमिनार का विषय 'इम्पेक्ट एंड नीड आफ एसेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन बाय नैक' था। उन्होेंने कहा कि मूल्यांकन से विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता का भी पता चल सकेगा।
उन्होंने मूल्यांकन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया और कालेज प्रतिभागियों की शंकाओं के बारे में उत्तर दिए। बंगलूरू स्थित नैक के डिप्टी एडवाइजर हैं। चेन्नई से 'आईकेयर' के वाइस चेयरमैन डॉ. कार्तिक श्रीधर ने शिक्षा संस्थानों में मूल्यांकन संस्कृति पर विचार रखे। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डीन कालेज डॉ. मदन मोहन गोयल ने 'मूल्यांकन की चुनौतियां' विषय पर व्याख्यान दिया। प्राचार्या डॉ. अर्चना मिश्रा ने सेमिनार के उद्देश्यों की जानकारी दी।
उच्चतर शिक्षा विभाग के उपनिदेशक डॉ. हेमंत वर्मा ने इस प्रकार के सेमिनार की आवश्यकता पर जोर दिया। इस मौके पर सेक्टर-1 कालेज के न्यूजलेटर 'कैंपस बज' का विमोचन किया गया। यह न्यूजलेटर पत्रकारिता एवं जन संचार ( मासकम्यूनिकेशन) के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किया हुआ है।
इस मौके पर कालेज की वेबसाइट (gc1panchkula.com) की औपचारिक लांचिंग की गई। इससे विद्यार्थियों को नवीनतम सुविधाएं व सूचनाएं उपलब्ध हो पाएंगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय, केंद्र सरकार से सलाहकार सारिका दीक्षित भी पर्यवेक्षक व गाइडेंस के लिए मौजूद थी।
रघुनाथ गर्ल्स कालेज, मेरठ की प्राचार्या डॉ. सीमा जैन ने नैक असेसमेंट के प्रतिमानों पर विचार रखे। लुधियाना से डॉ. वरिंदर थिंड, निदेशक खालसा कालेज ने भी अपने अनुभव सांझा किए। रजनी भल्ला इस सेमिनार की संयोजिका थीं, प्रो. रेणुका ध्यानी, मीनाक्षी सिंह और विनीता गुप्ता ने विभिन्न सत्रों में एंकरिंग की।