चंडीगढ़। प्रदेश में गिरते भूजल के चलते इस बार प्रदेश सरकार ने धान का करीब दो लाख एकड़ रकबा कम करते करीब 12 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया है। साथ ही मेरा पानी, मेरी विरासत योजना को इस साल भी लागू किया जा रहा है। इसके तहत धान की खेती छोड़कर फसल विविधीकरण के तहत बाजरा, मक्का, दाल या सब्जी उगाने वाले किसानों को 7000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
पिछले दो साल से हरियाणा सरकार धान का रकबा घटाने के लिए प्रयास कर रही है। हरियाणा के 19 ब्लॉक ऐसे है, जो डार्क जोन में हैं, उसमें 11 ब्लॉक में धान की खेती नहीं होती है। पिछले साल से सरकार रतिया, सिरसा, सीवन, गुहला, पीपली, इस्माइलाबाद, बाबैन और शाहाबाद में धान के पिछले वर्ष के क्षेत्र में कम-से-कम 50 प्रतिशत क्षेत्र में दलहन व बागवानी फसलें लगाने को प्रोत्साहित कर रही है। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद किसानों का धान की खेती से मोह नहीं छूट रहा है।
यूं बढ़ता गया धान का रकबा और घटता गया भू जल स्तर
जब से हरियाणा बना है, तभी से प्रदेश में भू जल गिरता जा रहा है और धान का रकबा बढ़ता जा रहा है। वर्ष 1966 में जहां 1.92 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई होती थी। अब इसका रकबा करीब सात गुणा से अधिक हो चुका है। वर्ष 2014 में 12.77 लाख हेक्टेयर, 2015 में 13.53, वर्ष 2016 में 13.86, वर्ष 2017 में 14.22, वर्ष 2018 में 14.47 और वर्ष 2019 में 14.70 और 2020 में 15.59 लाख हेक्टेयर था। उधर, प्रत्येक साल 1 मीटर भूजल में गिरावट आ रही है। प्रदेश का औसतन भू-जल स्तर 20.65 मीटर है। भू-जल की कमी धान उत्पादक जिलों में सबसे अधिक हो रही है। कुरुक्षेत्र में यह 41.4 मीटर, करनाल में 21.2 मीटर, कैथल में 31.95 मीटर तक नीचे जा चुका है। जबकि महेंद्रगढ़ में भू-जल सबसे अधिक नीचे है 47.36 मीटर तक जा चुका है।
15 जून से पहले बिजाई पर प्रतिबंध
प्रदेश में ‘हरियाणा राज्य अधोभूमि जल संरक्षण अधिनियम’ के तहत 15 जून से पहले रोपाई पर प्रतिबंध है। यदि कोई किसान ऐसा करता है तो धान की फसल को भी नष्ट कर दिया जाएगा। पहली बार दोषी पाए जाने पर अस्थायी तौर पर तथा दूसरी बार दोषी पाए जाने पर स्थायी तौर पर बिजली का कनेक्शन तक काटने का प्रावधान है। किसानों पर जुर्माना भी किया जा सकता है। धान की बिजाई व रोपाई को नष्ट करने का खर्चा आरोपित किसान को ही देना होगा। किसान 15 मई से 30 जून तक धान रोपाई के लिए नर्सरी तैयार कर सकते हैं और 15 जून से 30 जुलाई तक धान की रोपाई कर सकते हैं।