प्रमुख स्थानों पर झुंड में बैठे रहते हैं कुत्ते, वाहन के पीछे दौड़ने से रहती है हादसों की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
कालका। कस्बे में लावारिस कुत्तों से हाहाकार की स्थिति है। कालका अस्पताल में आठ दिन में डाग बाइट के 32 मामले सामने आने के बाद लोगों में भय का माहौल है। हालात इस कदर भयावह हैं कि प्रमुख स्थानों पर कुत्तों को झुंडों को बैठे देखा जा सकता है। घरों से बाहर नहीं निकल पाने की वजह से लोगों का बुरा हाल है। आवारा कुत्ते कभी बच्चों को अपना निशाना बनाते हैं, तो कभी वाहन चालकों के पीछे दौड़ने लगते हैं। नगर परिषद के साथ लगती गलियों के अलावा काली माता मंदिर के नजदीक भी लावारिस कुत्तों का आतंक है। अकसर ये कुत्ते लोगों और वाहन चालकों के पीछे दौड़ते नजर आते हैं।
हर गली, चौक-चौराहे पर मिलेंगे आवारा कुत्ते
शहर में कई स्थानों पर आवारा कुत्तों के झुंडों को देखा जा सकता है। इनकी संख्या बढ़ने से शहर के लोगों में जगह-जगह भय का वातावरण है। कालका कमेटी चौक, बस स्टैंड, गांधी चौक, रेलवे रोड सहित गलियों में भारी संख्या में इनको घूमते देखा जा सकता है। यह कुत्ते अकसर आने-जाने वाले लोगों पर झपट पड़ते हैं, कई बार आपस में लड़ते-लड़ते बीच सड़क में आ जाते हैं। इससे वाहनों मुख्य रूप से दोपहिया वाहन चालकों से उलझकर गिरने का खतरा बना रहता है। शहर के अंदर ऐसी कोई गली और मोहल्ला नहीं जहां इनका आतंक न हो। शाम ढलने के बाद शहर के गली-मोहल्लों में पैदल या दोपहिया वाहनों का निकलना खतरे से खाली नहीं होता।
गाजियाबाद घटना से भय का माहौल
गत दिनों गाजियाबाद में कुत्ते के काटने से 14 साल के बच्चे की तड़प-तड़पकर मौत हो गई थी। इसका वीडियो सोशल साइट पर तेजी से वायरल हो रहा है। AIIMS से लेकर तमाम बड़े अस्पतालों ने उसको लाइलाज घोषित कर दिया था। हाल ही में उक्त बच्चे ने एम्बुलेंस में अपने पिता की गोद में दम तोड़ दिया था। इस बच्चे को कुत्ते के काटने के बाद अजीबो-गरीब दिक्कतें होनी शुरू हो गईं थीं। उसको पानी देखने से डर लगने लगा। खाना-पीना बंद कर दिया। कभी-कभी भौंकने जैसे आवाजें भी मुंह से निकलने लगी थी। फैमिली ने कुछ डॉक्टरों को दिखाया तो पता चला कि उसे कुछ समय पहले किसी कुत्ते ने काटा। इससे इंफेक्शन फैल गया था। अब इस घटना के सामने आने के बाद शहरवासी अपने बच्चे को कहीं भी अकेला भेजने में कतराने लगे हैं, क्योंकि शहर में कुत्तों की भरमार है।
प्रशासन पूरी तरह फेल
आवारा कुत्तों की बढ़ती तादाद ने शहरवासियों की परेशानी बढ़ा दी है। यह मुद्दा शहर की प्रमुख समस्याओं में सबसे बड़ी है। प्रशासन को इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने चाहिए, बात अगर धरातल की करें तो प्रशासन अभी तक इस समस्या से निजात दिलाने में पूरी फेल साबित हुआ है। - सुनील सोनकर, स्थानीय निवासी
जल्द चलाया जाए अभियान
शहर में आवारा कुत्तों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, रोजाना अस्पताल में लावारिस कुत्तों के काटने के मामले सामने आ रहे हैं। प्रशासन को इनकी बढ़ती संख्या रोकने के लिए और इनके आतंक से बचाने के लिए जल्द अभियान चलाना चाहिए। -सितारचंद, स्थानीय निवासी
एक सप्ताह में डॉग बाइट के 32 मामले आए हैं। कुत्तों के काटने पर सबसे पहले उस जगह को कम से कम 15 मिनट साफ पानी और साबुन से साफ करना चाहिए। इसके बाद अस्पताल में जाकर इलाज करवाना चाहिए। कालका अस्पताल में कुत्ते के काटने पर पहुंचने वाले मरीजों को टेटनेस का टीका लगाने के बाद उसकी एंटी रेबीज की वैक्सीन शुरू हो जाती है। शुरुआत में जीरो डोज लगती है, तीसरे, सातवें, 14वें, 28वें और लास्ट डोज तीसरे महीने लगती है। -डाॅ. राजीव नरवाल, एसएमओ एसडीएच कालका।
स्टरलाइजेशन का टेंडर अलाट किया हुआ है। इसकी साइट के लिए प्रपोजल रखा है। पहले जो साइट टेंडर में लगाई थी, वह उपयुक्त नही थी। जगह उपलब्ध करवाने के लिए डीएमसी से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही स्टरलाइजेशन का काम शुरू करवा दिया जाएगा। -रविन्द्र कुहाड़, ईओ नगर परिषद कालका