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पांच परिवारों के लिए फरिश्ता बनकर आया रवि

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organ donation
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चंडीगढ़। डेराबस्सी का रवि कपूर अब पांच अलग-अलग परिवारों के लिए फरिश्ता बन गया है। एक एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल रवि को पीजीआई में एडमिट कराया गया लेकिन डाक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। बाद में उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। परिजनों की सहमति के बाद उसके शरीर की जांच की गई तो किडनी, कोर्निया और लिवर ठीक पाए गए। पीजीआई की टीम ने पहले उन्हें सुरक्षित निकाले और बाद में लिवर और दोनों किडनी अलग-अलग मरीजों में ट्रांसप्लांट कर दिए। सभी ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रहे। अब कोर्निया को एक दो दिन में मरीज में ट्रांसप्लांट कर दिए जाएंगे।
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पीजीआई के मुताबिक ,13 जुलाई की रात को 29 वर्षीय रवि कपूर बाइक से घर वापस लौट रहे थे। तभी एक जानवर को बचाने के चक्कर में वह उसकी चपेट में आ गए। इससे रवि के सिर पर गंभीर चोटें आईं। पहले उन्हें लोकल सिविल हास्पिटल में एडमिट कराया गया। उसके बाद सेक्टर-32 मेडिकल कालेज और फिर पीजीआई रेफर कर दिया गया। 17 जुलाई को पीजीआई ने रवि को ब्रेन डेड घोषित किया। हालांकि रवि की फैमिली आर्गन डोनेशन के प्रति पहले से ही अवेयर थी। ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेटर ने जब उनसे बात की तो रवि की फैमिली इसके लिए तैयार हो गई।
रवि ने आर्गन डोेनेशन की जताई थी इच्छा
रवि के बचपन के दोस्त हरीश ने बताया कि एक बार ब्लड डोनेशन के दौरान रवि ने आर्गन डोनेशन की इच्छा जताई थी लेकिन वह कर नहीं पाया था। वह रेग्युलर ब्लड डोनर था। जरूरतमंदों की मदद के लिए हर वक्त तैयार रहता था। घर में वह सबसे छोटा था। उसके एक भाई और एक बहन हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। रवि एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। भविष्य में वह शू कंपनी खोलने वाला था। एक्सीडेंट की रात वह अपनी कंपनी का लोगो डिजाइन करके वापस घर लौट रहा था।
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अगर रवि ने हेलमेट पहना होता तो बच सकती थी जान
पीजीआई की ओर से बताया गया था कि जब रवि का एक्सीडेंट हुआ तो उसने हेलमेट नहीं पहना था। अगर वह हेलमेट पहने होता तो सिर पर गंभीर चोट नहीं लगती। सिर का बचाव होने से उसकी जान बच सकती थी। ऐसे में डाक्टरों ने दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनकर ही बाइक व स्कूटर चलाने की सलाह दी है।
कोट
कपूर फैमिली के एक फैसले से पांच परिवारों को नया जीवन मिला है। रवि का जाना उसके परिजनों के लिए बहुत दुखद है। ऐसे मुश्किल वक्त पर इस तरह का फैसला लेना उसके परिजनों के लिए एक बड़ा कदम है।
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-विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो पीजीआई चंडीगढ़
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