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कागजों में हेरफेर कर मुआवजा और प्लाट लेने पर कार्रवाई के आदेश, विधानसभा अध्यक्ष ने प्लॉट ठगने वालों पर केस दर्ज कर रिपोर्ट मांगी

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पंचकूला। गांव भैंसा टिब्बा में एक व्यक्ति की जमीन के कागजात में हेरफेर कर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से ओस्टीज कोटे का प्लॉट और मुआवजा लेने के मामले में हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक और ईओ को जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही पुलिस को मामले में केस दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 दिन में रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्य प्रशासक अजीत बालाजी जोशी को फोन करके रिपोर्ट मांगी है। एचएसवीपी द्वारा कमेटी का गठन करके जांच शुरू कर दी गई है।
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पीड़ित जोगिंद्र सिंह के पुत्र बलवीर सिंह के एडवोकेट गुरमेल सिंह दूहन ने बताया कि गांव भैंसा टिब्बा में जोगिंद्र सिंह के नाम पर 60 बीघा 11 बिस्वा जमीन की मोटेशन हुई थी। जोगिंद्र सिंह ने रजिस्ट्री 196 के तहत 0.1 मरला और 4 मरला जमीन 7 सितंबर 1967 को शिवराम को बेच दी। आरोप है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पूर्व क्लर्क शिवराम ने दस्तावेजों में हेरफेर कर 7 सितंबर 1969 को इसी 5 मरला का इंतकाल अपने नाम करवा लिया। जोगिंद्र सिंह ने मामले में जमीन के जब वर्ष 2001 में कागजात तहसील से प्राप्त किया तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
यह है मामला
शिवराम ने भूमि अर्जन कलेक्टर विभाग के दस्तावेजों में विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से 0.1 मरला को 1.0 में बदलवा लिया। यह हेरफेर करते ही एक मरले जमीन की जगह शिवराम के नाम पर कागजों में एक कनाल जमीन हो गई। वर्ष 1984 में जब गांव भैंसा टिब्बा की जमीन का अधिग्रहण हुआ तो शिवराम ने एक कनाल 4 मरले जमीन के बदले ओस्टीज कोटे में प्राधिकरण से सेक्टर 4 एमडीसी में 6 मरले का प्लॉट और मुआवजा ले लिया। उसने बाकायदा एफिडेविट भी प्राधिकरण के पास जमा कर दिया। मामले में जोगिंद्र सिंह ने प्राधिकरण के संपदा अधिकारी को शिकायत दी। इसकी जांच के लिए ईओ एचएसवीपी पंचकूला ने 16 नवंबर 2012 को एक कमेटी का गठन किया, जिसमें लॉ आफिसर और भूमि अर्जन कलेक्टर आफिसर पंचकूला को शामिल किया गया। कमेटी ने जांच में पाया कि शिवराम ने विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया है। हेरफेर करके उसने मनसा देवी कांप्लेक्स सेक्टर-4 में 6 मरला प्लॉट नंबर 213ए ले लिया।
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पुलिस ने नहीं की कोई कार्रवाई
24 जुलाई 2014 और 10 दिसंबर 2014 को सेक्टर-5 पुलिस को केस दर्ज करने के लिए ईओ एचएसवीपी ने पत्र लिखा, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। एचएसवीपी के प्रशासक और मुख्य प्रशासक ने भी केस दर्ज करवाने के लिए पत्र लिखे, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरटीआई में डीजीपी ऑफिस ने इस बात को माना कि एफआईआर के एचएसवीपी से पत्र मिला है, लेकिन सेक्टर-5 थाना प्रभारी की ओर से कोई भी पत्र प्राप्त होने से इनकार कर दिया गया। शिकायतकर्ता की वर्ष 2016 में मृत्यु हो गई, लेकिन उसने अपने बेटे बलवीर सिंह के नाम पर वर्ष 2010 में विल कर दी थी।
इस मामले में बलवीर सिंह अदालत की शरण में पहुंचा तो सिविल जज पंचकूला ने आदेश दिया कि आरोपियों शिवराम ने दस्तावेजों में हेरफेर कर गलत तरीके से ओस्टीज कोटे मेें 6 मरले का प्लॉट लिया है, जोकि वापस लिया जाए और मुआवजा भी रिकवर किया जाए। एडवोकेट गुरमेल सिंह दूहन ने अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में डीजीपी हरियाणा, डीसीपी पंचकूला, एसएचओ सेक्टर-5, मुख्य प्रशासक एचएसवीपी, संपदा अधिकारी एचएसवीपी, भूमि अर्जन कलेक्टर अर्बन इस्टेट सेक्टर-8 पंचकूला, शिवराम सहित करीब 17 लोगों के खिलाफ याचिका डालकर मामले में एफआईआर ना दर्ज करने पर कार्रवाई की मांग की है। हाईकोर्ट ने इस मामले में मुख्य प्रशासक, भूमि अर्जन कलेक्टर और पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब देने के आदेश दिए हैं।
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