मोहाली। एरोसिटी के पास स्थित गांव बड़ी का सरकारी प्राइमरी स्मार्ट स्कूल केवल नाम का स्मार्ट है। स्टाफ की भारी कमी के बावजूद यहां पढ़ाई से लेकर सफाई तक की जिम्मेदारी सिर्फ दो शिक्षकों के कंधों पर है। स्कूल में नर्सरी से लेकर पांचवीं तक कुल 61 विद्यार्थी हैं, जबकि शिक्षकों की संख्या सिर्फ दो है। स्कूल इंचार्ज पंकज सग्गी और शिक्षिका वीरा वालिया ही स्मार्ट स्कूल में बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। शिक्षकों की कमी की वजह से बच्चों की संख्या में कम हो गई है। केवल इस बार यह संख्या 55 से बढ़कर 61 पहुंच गई है। इसके बाद भी स्टाॅफ में कोई वृदि्ध नहीं हुई है। स्कूल की पांचवीं कक्षा में 13, चौथी में 11, तीसरी में चार, दूसरी में 11, पहली में 6, यूकेजी में सात, एलकेजी में तीन और नर्सरी में 6 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। एक शिक्षक को आठ कक्षाएं संभालनी पड़ती हैं। शिक्षण कार्य के साथ-साथ उन्हें क्लर्क, एकाउंटेंट, रिकॉर्ड मेंटेनेंस, बाहरी चेकिंग, चुनाव ड्यूटी जैसे कई गैर-शैक्षणिक काम भी करने पड़ते हैं। एक शिक्षक की छुट्टी पर पूरी स्कूल व्यवस्था सिर्फ एक ही शिक्षक के भरोसे रहती है।
सफाई का खर्च जेब से, बाउंड्री वॉल खतरे में
स्कूल में मिड-डे मील के लिए दो कर्मचारी हैं, लेकिन सफाई और चौकीदारी की कोई व्यवस्था नहीं। कई बार शिक्षक अपनी जेब से पैसे देकर सफाई करवाते हैं। बरसात में घास इतनी उग जाती है कि सांपों का खतरा बढ़ जाता है। स्कूल की बाउंड्री वॉल सफेदे के पेड़ों की जड़ों से टेढ़ी हो चुकी है। यह कभी भी गिर सकती है। वन विभाग ने पेड़ों की मार्किंग कर दी है, पंचायत ने समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन कार्रवाई अभी बाकी है।
प्रवासी परिवारों के बच्चे, पंचायत का सहयोग
गांव के संपन्न परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजते हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में ज्यादातर विद्यार्थी प्रवासी परिवारों से आते हैं। पंचायत और ग्रामीण समय-समय पर सहयोग करते हैं। टीचर-अभिभावक मीटिंग होती है, बच्चों की पढ़ाई पर चर्चा होती है। शिक्षक सीमित संसाधनों में बेहतर शिक्षा देने की कोशिश कर रहे हैं।
हिंदी जरूरी, पंजाबी सीमित
बिहार के रहने वाले एक अभिभावक ने बताया कि उनकी बेटी चौथी कक्षा में यहीं पढ़ रही है, लेकिन बेटे को बिहार भेज दिया है। यहां चौथी-पांचवीं में ही हिंदी पढ़ाई जाती है, जबकि पंजाबी हमारे किसी काम की नहीं। सरकारी नौकरी के लिए हिंदी जरूरी है, इसलिए बेटे को बिहार पढ़ने भेजा।
शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। जैसे ही नए शिक्षक उपलब्ध होते हैं, उन्हें आवश्यकता अनुसार स्कूलों में तैनात किया जाएगा। गैर-शैक्षणिक कार्य सरकारी दायित्व हैं, जिन्हें निभाना ही पड़ता है। गांव बड़ी स्कूल की बाउंड्री वॉल की जानकारी संज्ञान में आई है, संबंधित विभाग से बात कर उनका समाधान करवाया जाएगा। - दर्शनजीत सिंह, डीईओ (एलीमेंट्री), मोहाली