चंडीगढ़। पंजाब रोडवेज और पनबस के अधिकारियों के रवैये को पनबस की कंगाली के हालात का जिम्मेदार बताते हुए दाखिल जनहित याचिका पर बुधवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव, पनबस की निदेशक, वित्त विभाग व पंजाब के प्रधान महालेखाकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका में पनबस को बचाने के लिए निर्देश जारी करने की अपील की गई है। याचिका दाखिल करते हुए फाजिल्का निवासी हरजुपींद्र सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि पनबस के वर्तमान निदेशक के कारण विभाग को बीते एक साल में 200 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। पंजाब रोडवेज/पनबस के पूरे प्रदेश में 18 डिपो हैं जिसमें 1815 बस हैं। अधिकारियों के उदासीन रवैए और प्राइवेट बस ऑपरेटरों को लाभ देने के लिए इनमें से 568 बसों का संचालन नहीं किया जा रहा है। इन खड़ी बसों का टैक्स और बीमा भरा जा रहा है। इन बसों के न चलने के कारण विभाग को एक साल में लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान होने का अंदाजा है। वर्तमान की आम आदमी पार्टी की सरकार पहली बार सत्ता में आई है और इसका लाभ उठाकर अधिकारी उन्हें गुमराह कर रहे हैं। जब से वर्तमान निदेशक ने कार्यभार संभाला है तब से पनबस को नुकसान हो रहा है। निदेशक व कुछ अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं और प्राइवेट बस ऑपरेटरों को लाभ देने का काम कर रहे हैं।
याचिका में पनबस के खातों की प्रधान महालेखाकार पंजाब से ऑडिट कराने व पनबस के अधिकारियों के आचरण व कार्यप्रणाली की जांच करवाने की हाईकोर्ट से मांग की गई है। याचिका के अनुसार सरकार करोड़ों रुपये पनबस के प्रशासनिक ढांचे पर खर्च कर रही है लेकिन कुछ अधिकारी पनबस को नुकसान का कारण बन रहे हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब देने का आदेश दिया है।