पंचकूला सेक्टर 5 शालीमार ग्राउंड में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में स्कूली छात्र-छात्राओं
पर्यावरण को साफ और सुरक्षित रखते हुए बिजली बनाने का मॉडल किया पेश
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। देश में कार्बन उत्सर्जन के बिना पर्यावरण को साफ और सुरक्षित रखते हुए परमाणु संयंत्र से बिजली बनाने का प्रभावशाली तरीका सामने आ रहा है। परमाणु बिजली का वर्किंग मॉडल विद्यार्थियों को दिखाकर इसे जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में वैज्ञानिक लगातार प्रयासरत हैं। यह बिल्कुल सुरक्षित तरीका है जिससे स्थाई रूप से बिजली का उत्पादन होगा और पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के दौरान सेक्टर-5 स्थित शॉलीमार ग्राउंड में परमाणु बिजली के वर्किंग मॉडल को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी में न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के अध्यक्ष एवं निगम योजना संचार के अधिशासी निदेशक प्रतीक अग्रवाल ने बताया कि इस मॉडल के जरिये विद्यार्थियों को जागरूक कर रहे हैं। इसके जरिये केंद्र सरकार का अगले साल तक 100 गीगावाट तक बिजली बनाने का लक्ष्य रखा है जो पूरी तरह से कार्बन मुक्त और पर्यावरण के लिए लाभकारी होगी।
इस तरह बनेगी परमाणु बिजली
एनपीसीआईएल के चीफ इंजीनियर कम्युनिकेशन उमेद यादव ने बताया कि परमाणु ऊर्जा का प्रयोग एटॉमिक एनर्जी से किया जाता है। इसमें परमाणु विखंडन से उत्पन्न उर्जा को हीट में बदलकर, हैवी वाटर का उपयोग कर पानी को भाप में परिवर्तित किया जाता है। इस भाप से टर्बाइन घुमाई जाती है जो जनरेटर को जोड़कर बिजली का उत्पादन करती है। यह बिजली फिर ग्रिड में भेजी जाती है।
सुरक्षा की पूर्ण गारंटी
उमेद यादव ने बताया कि इस प्रक्रिया में सुरक्षा की पूर्ण गारंटी है। इसमें किसी तरह का कोई विकिरण नहीं फैलता है। परमाणु संयंत्र में यह सुनिश्चित किया जाता है कि विकिरण का कोई खतरा न हो और जनता को कोई भी नुकसान न पहुंचे। प्रदर्शनी के जरिये विद्यार्थियों को न केवल परमाणु बिजली के सुरक्षित तरीके से परिचित कराया गया बल्कि उन्हें बताया गया कि कैसे यह ऊर्जा का साफ और स्थिर स्रोत बन सकती है जो भविष्य में ऊर्जा संकट का समाधान भी हो सकता है। भारत सरकार की ओर से परमाणु बिजली संयंत्रों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है ताकि इस कार्बन-मुक्त ऊर्जा के माध्यम से भारत अपने पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए और ऊर्जा की आवश्यकता को पूरा कर सके।