चंडीगढ़। हरियाणा में अब राजस्व संपदा (कृषि भूमि) की मैपिंग होगी। गांवों के लाल डोरे की ड्रोन मैपिंग का कार्य पूरा होने के बाद सर्वे ऑफ इंडिया 31 अगस्त से इस कार्य में जुटेगा। कृषि भूमि की मैपिंग का काम आगामी छह माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
वित्तायुक्त, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने डीसी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से स्वामित्व योजना की समीक्षा बैठक में शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि भूमि की मैपिंग का कार्य सर्वे ऑफ इंडिया से करवाने की मंजूरी दी है। राज्य सरकार इसका खर्च वहन करेगी। ब्रिटिश काल से चली आ रही लाल डोरा की प्रथा को खत्म करने के मद्देनजर 24 अगस्त तक 22 जिलों के लगभग 6329 गांवों के लाल डोरे की मैपिंग का काम पूरा कर लिया गया है।
कौशल ने कहा कि स्वमित्व योजना के तहत 1990 गांवों में 1,63,262 संपत्तियों का पंजीकरण किया है। 1963 गांवों में 1,59,041 संपत्ति कार्ड वितरित किए हैं। इस पर कुल 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे। टाइटल डीड पंजीकरण और वितरण का कार्य भी इसमें शामिल है। इसे 31 अक्तूबर 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा। कौशल ने डीसी से गांवों में भू-स्वामियों की संपत्तियों का पंजीकरण मुफ्त में किए जाने का प्रचार करने का आग्रह किया है। लाल डोरा शब्द का प्रयोग पहली बार 1908 में गांव की बस्ती (आबादी) भूमि को परिभाषित करने के लिए किया गया था। लाल डोरा को भवन उपनियमों/निर्माण कानूनों/अनुसूचित क्षेत्रों आदि से छूट दी गई थी, जिसके कारण इन संपत्तियों का विकास हुआ। पहले लाल डोरा में मकान या जमीन के लिए कोई रजिस्ट्री नहीं होती थी और इससे परिवारों और समाजों में टकराव होता था। गांवों में सार्वजनिक स्थानों, खेल के मैदानों, तालाबों, नालियों आदि पर अतिक्रमण कर लिया गया था।