कालका। प्राचीन श्री काली माता मंदिर कालका में अब श्रद्धालु नियम व शर्तों के साथ माता का प्रसाद मंदिर के अंदर लेकर जा सकते हैं। भक्तों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि प्रसाद मंदिर में न तो चढ़ेगा और न ही प्रसाद का किसी मूर्ति से स्पर्श करना होगा व न ही माता को प्रसाद का भोग लगेगा।
इतना ही नहीं श्रद्धालुओं की ओर से लाए गए प्रसाद को मंदिर में रखा भी नहीं जाएगा। केवल श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर प्रसाद लेकर जा सकेंगे। इसके बाद वापसी में उन्हें प्रसाद को भी वापस अपने साथ ही लेकर आना होगा।
पहले माता की चुनरी ले जाने की मिली थी अनुमति
बता दें कि कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर को नियम व शर्तोें के साथ सरकार की गाइडलाइन के अनुसार श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया था। इसके बाद मंदिर में किसी भी मूर्ति व स्थान को स्पर्श करने सहित मंदिर में प्रसाद अथवा माता के श्रृंगार का सामान इत्यादि सामग्री लेकर जाने की अनुमति नहीं थी। केवल श्रद्धालुओं को माता के दर्शन करके वापस आना होता था लेकिन अनलॉक के बढ़ते चरणों के बीच पहले माता की चुनरी को मंदिर में ले जाने की अनुमति दे दी गई थी। इसके बाद अब मंदिर में प्रसाद अंदर ले जाने पर भी रोक हटा दी गई है अब श्रद्धालु कुछ नियम व शर्तों के मद्देनजर मंदिर में प्रसाद लेकर जा रहे हैं।
प्रसाद बेचने वाले दुकानदारों के खिले चेहरे
वैश्विक बिमारी कोरोना के मद्देनजर प्राचीन श्री काली माता मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया था। ऐसे में अनलॉक के बाद मंदिर को नियम व शर्तों के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल तो दिया गया था लेकिन मंदिर में प्रसाद लेकर जाने पर रोक लगी हुई थी जिसके चलते मंदिर के आसपास प्रसाद के दुकानदारों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था लेकिन अब मंदिर में प्रसाद लेकर जाने की अनुमति के बाद प्रसाद के दुकानदारों के चेहरे भी खिल उठे हैं।