चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के पंजाब क्षेत्र के लंबे समय से कार्यरत कैजुअल कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने 1 फरवरी 2017 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावे को खारिज कर दिया गया था।
जस्टिस संदीप मुदगिल ने स्पष्ट कहा कि स्थायी प्रकृति के पदों पर वर्षों तक कार्य लेने के बावजूद कर्मचारियों को नियमित न करना अनुचित श्रम व्यवहार है। अदालत ने पूर्व आदेश को मनमाना और असांविधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया। याचिकाकर्ता 1986-87 से एफसीआई के पंजाब रीजन कार्यालय में कैजुअल वर्कर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 6 नवंबर 1995 या 10 सितंबर 1993 की डीओपीटी हिदायतों के आधार पर नियमितीकरण और सभी परिणामी लाभ देने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने पाया कि कर्मचारियों को सीधे एफसीआई ने नियुक्त किया था और वे तीन दशक से अधिक समय से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। जिस कार्य को वे कर रहे हैं, उसे स्वयं निगम ने स्थायी प्रकृति का माना है। हाईकोर्ट ने एफसीआई को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं और उनके समान स्थिति वाले अन्य कर्मचारियों के लिए एकमुश्त नियमितीकरण प्रक्रिया चार माह में पूरी की जाए। पात्रता पूरी करने की तिथि से उपलब्ध श्रेणी-IV/वॉचमैन या समकक्ष पदों पर नियमित नियुक्ति पर विचार किया जाएगा।
अदालत ने वेतन निर्धारण, बकाया राशि और देय तिथि से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के भी आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले से तीन दशक से अधिक समय से अस्थायी रूप से कार्य कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।